मसाला उत्पादक किसानों की भाजपा सरकार कर रही उपेक्षा

 

किसानों की आर्थिक स्थिति में आई गिरावट

 

लहसून उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ी लेकिन सरकार उदासीन

 

​कानपुर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव के०के० शुक्ल एक गोष्ठी में बताया कि देश के मसाला उत्पादक किसानों ने एक दशक में उत्पादन 55 लाख टन से बढ़ाकर एक सौ बीस लाख टन पहुंचाया जिसमें उत्तर प्रदेश के किसानों का विशेष योगदान रहा लेकिन भाजपा किसानों की उपेक्षा कर रही जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति में गिरावट आयी है।

​श्री शुक्ल ने आगे कहा कि उत्तरप्रदेश के किसानों का उत्पादित लहसून, अदरक सौंफ, मैथी, धनिया की विशेष गुणवत्ता छायी है यदि भाजपा सरकार किसानों की उपेक्षा करने के बजाय किसानों की मदद करे तो निर्यात उक्त मसालों के निर्यात से, फायदा उठाया जा सकता क्योंकि देश में काली मिर्च, इलायची, मिर्च, हल्दी, अजवाइन सौंफ, जायफल और जावित्री जैसे मसाले बड़े स्तर पर उगाये जाते जिससे कुछ मसालों का निर्यात होता है

 

श्री शुक्ल ने कहा कि अदरक, धनिया, मिर्च, हल्दी-जीरा गुणवत्ता में आगे है लेकिन अर्न्तराष्ट्रीय व्यापार में हिस्सा कम है | भारत का मसाला अमेरिका, बांग्लादेश, और मलेशिया को निर्यात होता है | प्रदेश और देश में मसालों को 15वीं शताब्दी में वास्कोडिगामा सहित अन्य खोजियों को यहां के मसालों ने आकर्षित किया |

 

​श्री शुक्ल ने आगे कहा कि लहसून, धनिया मैथी, अदरक आदि मसालों का उत्पादन बढ़ाने के लिये सरकार को किसानो पर ध्यान देना होगा जिससे किसानो को फायदा हो और निर्यात बढ़े तथा मसाला उत्पादक किसानों के लिये बजर बढ़ाया जाये | तथा उत्पादन में रासायनिक प्रयोग सीमा तय की जाये तथा गुणवत्ता भी रखी जाये क्योंकि किसानों के उत्पादन का फायदा बिचौलिया ले जाते है |

​श्री शुक्ल ने आगे कहा कि जीरा इस समय 250 रूपये प्रति किलो फुटकर में बिक रहा है जो गुजरात से आता है | मैथी 75 रूपये किलो बिक रही तथा लहसून फुटकर में 130 रूपये प्रति किलो से लेकर गढ़िया लहसून 200 रूपये प्रति किलो बिक रहा है | अदरक का उत्पादन यू. पी. में ज्यादा है लेकिन फुटकर में 50 रूपये प्रति किलो बिक रही | धनिया सूखी 120 रूपये प्रति किलो बिक रही लेकिन किसानों को अपने उत्पादन का फायदा नही मिल पाता है यदि किसानों को उत्पादन में बढ़ाने में ध्यान दे तो उत्पादन बढ़ेगा जिससे प्रदेश के उपभोक्ताओं को फायदा होगा और निर्यात होने से किसानो को भी फायदा पहुंचेगा |

 

​श्री शुक्ल ने आगे कहा कि उ०प्र० किसानों के लहसून के एक जवा तथा गढिया की विशेष गुणवत्ता मानी गयी है लेकिन सरकार किसानों पर ध्यान न देकर, उपेक्षा का भाव बना कर मनोबल तोड रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *