यूपी बार काउंसिल चुनाव – नरेश चंद्र त्रिपाठी का बड़ा आरोप
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। कानपुर से वरिष्ठ अधिवक्ता और यूपी बार काउंसिल सदस्य पद के प्रत्याशी नरेश चंद्र त्रिपाठी ने प्रेसवार्ता कर अपने विरोधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। त्रिपाठी का कहना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उन्हें चुनाव लड़ने से रोकने की साजिश रची जा रही है।
कानपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री और अध्यक्ष नरेश चंद्र त्रिपाठी ने दावा किया कि प्रदेशभर के अधिवक्ताओं का उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है और उनकी जीत लगभग तय है। इसी वजह से मौजूदा बार काउंसिल सदस्यों और प्रतिद्वंदी प्रत्याशियों में डर का माहौल है।मेरी लोकप्रियता से घबराकर कुछ लोग मुझे चुनाव लड़ने से रोकना चाहते हैं। एक बाहरी व्यक्ति के माध्यम से मेरे खिलाफ झूठी याचिका दाखिल कराई गई, लेकिन माननीय उच्च न्यायालय ने उसे निरस्त कर दिया।नरेश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका को कोर्ट ने आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया, वहीं बार काउंसिल के चुनाव अधिकारी ने भी प्रार्थनापत्र को अस्वीकार कर दिया है। प्रेसवार्ता में उन्होंने अपने पुराने संघर्षों का भी जिक्र किया। वर्ष 2009-10 में महामंत्री रहते हुए पुलिस और वकीलों के टकराव के दौरान कई अधिवक्ता घायल हुए, लंबे समय तक हड़ताल चली और न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। वहीं 2022-23 में अध्यक्ष रहते हुए न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 29 दिनों तक कार्य बहिष्कार भी हुआ।
37 साल की वकालत में मैंने हमेशा अधिवक्ताओं के मान-सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। आगे भी बिना डरे यह संघर्ष जारी रहेगा।त्रिपाठी ने कहा कि यदि वे बार काउंसिल सदस्य चुने जाते हैं तो अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से विरत रहने पर लगी पाबंदी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन करेंगे।फिलहाल, यूपी बार काउंसिल चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप भी तेज होते जा रहे हैं। अब देखना होगा कि अधिवक्ताओं का फैसला किसके पक्ष में जाता है।
