वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन – दिवस 12

“देशभक्ति से संचालित पैडल: एनसीसी साइक्लोथॉन का अविराम अभियान”

उद्देश्यपूर्ण पैडलिंग के साथ वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन ने दिवस 12 पर नई दिल्ली की ओर अपने प्रेरणादायी अभियान को निरंतर आगे बढ़ाया, जो साहस, दृढ़ता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। साइक्लोथॉन दल ने अडिग संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए महान स्वतंत्रता सेनानी वीर बिरसा मुंडा की विरासत को सम्मान देने तथा देश के युवाओं को प्रेरित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। फतेहपुर में रात्रि विश्राम के उपरांत साइक्लोथॉन को 60 यूपी बटालियन एनसीसी के प्रशासनिक अधिकारी कर्नल योगेन्द्र चिनवान द्वारा कानपुर के लिए औपचारिक रूप से रवाना किया गया। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स, अधिकारी एवं विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह प्रस्थान अनुशासित टर्नआउट, उच्च मनोबल एवं देशभक्ति से ओतप्रोत वातावरण के साथ सम्पन्न हुआ। प्रेरणादायी नारे “शौर्य के कदम, क्रांति की ओर” को आत्मसात करते हुए साइक्लिस्टों ने अद्भुत साहस और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना जारी रखा। यह यात्रा चुनौतियों से भरी रही—घना कोहरा, कड़ाके की ठंड और लगातार व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों ने अनेक बाधाएँ प्रस्तुत कीं। तथापि, इन प्रतिकूल परिस्थितियों ने दल के उत्साह को कम नहीं किया। इसके विपरीत, प्रत्येक चुनौती ने साइक्लिस्टों के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया तथा उनके मिशन के प्रति प्रतिबद्धता को प्रबल बनाया।

कानपुर पहुँचने पर साइक्लोथॉन दल का एनसीसी ग्रुप मुख्यालय, कानपुर के ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर प्रवीन शास्त्री, 55 यूपी बटालियन एनसीसी के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल सी. एस. मेहरा, एनसीसी कैडेट्स एवं स्थानीय समुदाय के सदस्यों द्वारा गर्मजोशी और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। स्वागत समारोह में एनसीसी कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत सुसंस्कृत एवं अनुशासित सांस्कृतिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहे, जिन्होंने देशभक्ति की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के पश्चात साइक्लोथॉन दल द्वारा एक प्रेरणादायी ब्रीफिंग दी गई, जिसमें वीर बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष एवं उनके अमिट योगदानों का प्रभावशाली वर्णन किया गया। उनके साहस, प्रतिरोध और सामाजिक सुधार के आदर्श आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं। दिवस 12 की गतिविधियाँ सामूहिक संकल्प की शक्ति और युवा नेतृत्व वाली पहलों की परिवर्तनकारी क्षमता का सशक्त उदाहरण रहीं। उच्च मनोबल और नवीन ऊर्जा के साथ साइक्लोथॉन दल ने कानपुर में रात्रि विश्राम किया। वीर बिरसा मुंडा साइक्लोथॉन दिवस 13 पर औरैया के लिए अपनी आगे की यात्रा पुनः आरंभ करेगा, साहस, एकता और राष्ट्रीय चेतना का संदेश—एक-एक पैडल स्ट्रोक के माध्यम से—आगे बढ़ाते हुए।

 

 

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