स्टेट जीएसटी की समस्याओं और ट्रिब्यूनल शुल्क में राहत की मांग को लेकर व्यापारियों ने सौंपे ज्ञापन
कानपुर। उत्तर प्रदेश में व्यापारियों व उद्यमियों को स्टेट जीएसटी से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान तथा जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील से संबंधित शुल्कों में राहत की मांग को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यकर विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव ब्रजेश मिश्र को उनके लखनऊ जोन कार्यालय में दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे।
वार्ता के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि अनेक व्यापारी ई-मेल नोटिस समय पर न देख पाने अथवा तकनीकी कारणों से नोटिस प्राप्त न होने के चलते निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हो सके, जिसके कारण उनके विरुद्ध एक्स पार्टी आदेश पारित कर दिए गए। ऐसे मामलों में व्यापारियों को पुनः सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक पक्ष सुना जा सके और न्यायिक पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में स्टेट जीएसटी के अंतर्गत उन व्यापारियों के लिए कोई विशेष एमनेस्टी योजना नहीं है, जिनकी अपीलें तकनीकी कारणों से स्वीकार नहीं हो सकीं। ऐसे मामलों के लिए 31 मार्च 2026 तक विशेष एमनेस्टी स्कीम लागू करने का सुझाव दिया गया।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई मामलों में अभिलेखीय या तकनीकी त्रुटियों के कारण बकाया राशि दर्शा दी जाती है और बिना पूर्व सूचना बैंक खाते, परिसंपत्तियां या स्टॉक सीज कर दिए जाते हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। संगठन ने कम से कम 15 दिन की नोटिस अवधि देने तथा स्पष्टीकरण का अवसर प्रदान करने की मांग की। सर्वे या जांच के दौरान स्टॉक सीज करने की कार्रवाई को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसे रोकने पर जोर दिया गया।
व्यापारियों ने यह मांग भी उठाई कि उत्तर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक जिला होने के बावजूद कानपुर में जीएसटी ट्रिब्यूनल की स्थापना नहीं की गई है, जबकि यहां अपीलों का भार अधिक है। कानपुर में ट्रिब्यूनल की स्थापना, अपील की कोर्ट फीस को नाममात्र करने, प्रार्थना पत्र पर लगने वाले 5,000 रुपये शुल्क को समाप्त करने तथा अभिलेख देखने व प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने जैसे शुल्कों में राहत की मांग रखी गई। इस दौरान अशोक अग्रवाल ताजपुरिया, श्यामसिंहल, रवि गुप्ता, संजय भदौरिया और मनीष गुप्ता सलोने प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। वार्ता के उपरांत संयुक्त सचिव ब्रजेश मिश्र ने सभी समस्याओं और सुझावों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
