जश्ने तकमील कुरान करीम व आमीन शरीफ

कानपुर मदरसा अरबिया रजकिया मदीनतुल उलूम बांस मंडी कुरान को देखना सवाब कुरान को छूना सवाब कुरान की तिलावत करना सवाब कुरान एक ऐसी किताब है जिसकी कोई मिसाल नहीं ऐ बंदे अगर तू खुशी चाहता है तो कुरान से मोहब्बत कर अगर तू बीमारी से निजात पाना चाहता हो तो कुरान की तिलावत कर अगर तुम कुरान को अपनी आंखों से देखोगे तो तुम्हें अल्फ़ाज़ नजर आएंगे अगर तुम इसे अपने दिमाग से देखोगे तो तुम्हें इल्म नजर आएगा अगर तुम इसे अपने दिल से देखोगे तो तुम्हें मोहब्बत नजर आएगी और अगर तुम इसे अपनी रूह से देखोगे तो तुम्हें खुदा दिखाई देगा ये विचार मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही काज़ी ए शहर कानपुर ने जश्ने तकमील कुरान करीम व आमीन शरीफ मदरसा रजकिया में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए व्यक्त किए और बताया इबादत ज़रूर कीजिए मगर मामलात पर खास तवज्जो दीजिए अल्लाह हमें तौबा के वक़्त ऐसा रोना अता फरमाए जो दिल की गहराइयों से निकले और इस तरह निकले कि तुझे हम पर रहम आ जाए और तू हमें माफ़ कर दे। जलसे की शुरुआत क़ारी शम्सुद्दीन ने क़ुरआन पाक की तिलावत से की और हाफ़िज़ मुहम्मद शाहज़ेब मुहम्मद वसीद और मुहम्मद अहमद ने नात शरीफ़ पेश की

अध्यक्षता कारी सगीर आलम हबीबी नायब काज़ी ए शहर व सरपरस्ती हजरत हाफिज व कारी अब्दुल रहीम ने की।

इस मौके पर मौलाना फिरोज अहमद हाफिज मुहम्मद खुर्शीद हाजी आसिफ रईस हाजी अतीक अहमद परवेज़ आलम गुड्डू मुहम्मद कैफ हाजी मुहम्मद नसीम हाजी मुहम्मद ताहिर हाजी महमूद आलम आदि मौजूद रहे।

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