*प्रयाग नारायण मन्दिर (शिवाला) का माघ मेला १६५वॉ श्री ब्रह्मोत्सव (स्थापना दिवस) सम्पन्न मन्दिर प्रांगण की भव्य सजावट एवं धार्मिक राष्ट्रीय प्रदर्शनी आकर्षण रही*

 

कानपुर १ फरवरी रविवार उत्तर भारत का सुप्रसिद्ध दक्षिण भारतीय शैली में स्थापित महाराज प्रयाग नारायण मन्दिर (शिवाला) का ११ दिवसीय स्थापना दिवस श्री ब्रस्मोत्सव (माघ मेला) धूम-धाम से परम्परागत रूप से सम्पन्न हुआ।

 

प्रातः ७ बजे शेषवाहन (सिंहासन) पर भगवान रंगनाय मन्दिर से भक्तों के कन्धों में निकलकर मन्दिर प्रांगण की परिक्रमा करते हुये जनकपुर गयी वहाँ प्रातः कालीन भक्ति- कीर्तन के पश्चात प्रसाद वितरण कर वापस मन्दिर आयो।

 

मंदिर के अन्दर भगवान का ओभषेक परम्परागत नारद पान्चरात्रि विधि से वृन्दावन, नैमिषारण से पधारे सन्तों महात्माओं की उपस्थित में मन्दिर के प्रधान व्यास पं करुणाशंकर के एवं आचार्य सूरजरीन के निर्देशन में सम्पन्न हुआ।

 

प्रातः १० बजे भव्य स्वर्ण सिंहासन में शिवाला मन्दिर से बैण्ड-बाजा की धुन में भक्तों महात्मामों एवं नगर के गणमान्य व्यक्तिओं, राजनेताओं के साथ शोभायात्रा में दक्षिणी शाही छात्र एवं रजत कलश, तुलसा जी की डोली के साथ गंगा जी यज्ञान्त स्नान हेतु प्रस्थान की। शोभायात्ता में बी० ए० एस० डी० शिक्षा निकेतन के प्रतिभाशाली बच्चों का बैंड एवं श्री निवास

बाल मण्डल वाद्य यंत्रों की धुन शोभा यात्रा का नेतृत्व कर रही थी जो प्रमुख आकर्षण का केन्द्र थी।

 

भगवान के सिंहासन के आगे सन्त महात्मा आचार्यगण संस्कृत श्लोको में स्तुति करते हुये चल रहे थे।

 

जगह-जगह शोभायात्रा का स्वागत के साथ-साथ पुष्प वर्षा की गयी।

 

शिवाला मन्दिर से सरसैय्याघाट तक जगह-जगह मन्दिरों मठ आदि में आरती एवं पूजन किया गया।

 

सरसैयाघाट गंगा तट पर शोभायात्रा विश्राम कर भगवान श्रीनिवास व्यंकटेश का विग्रह पालकी में सभी भक्त एवं सेवक, आचार्यगण जयकारा लगाते हुये गंगा जी की मुख्य धारा में स्नान करने गया।

 

स्नान हेतु गंगा जी की मुख्य धारा का स्थान पहले से सुनिश्चित एवं चयन कर लिया जाता है।

 

मुख्य धारा में डुबकी के साथ आरती करते हुये वैसे ही भींगे वस्त्रों के साथ वापस घाट पर आकर श्रंगार करके पुनः वापसी शोभा यात्रा आयी।

 

गंगा तट पर पंचमेवा प्रसाद वितरण एवं ऋतु फलों का सामूहिक वितरण हुआ।

 

शिवाला मंदिर में प्रवेश करने के उपरान्त मंदिर में तिलक एवं सभी सन्तो महात्माओं, आचार्यो, सेवको को दक्षिणा वितरण हुआ। सामूहिक महाप्रसाद एवं भण्डारा सम्पन्न हुआ।

 

 

सायंकाल ४ बजे से भव्य राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि तक चला

 

राति ८ बजे भव्य शाही सिंहासन में कन्धों में विराजमान भगवान निकले भव्य आकाशीय आतसबाजी मिल्ललीला के साथ मध्य रात्रि ११ बजे विधि-विधान से गरुण ध्वजा उतारकर भगवान के चरणों में विराजी गयी और जयकारों के साथ १६५ वा श्री ब्रह्मोत्सव ( माघ मेला) का समापन हुआ।

 

समस्त कार्यक्रम मंदिर ‘अध्यक्ष ‘ विजय नारायण तिवारी एवं प्रबंधक अभिनव नारायण तिवारी की देखरेख में सम्पन्न हुआ।

 

प्रमुख रूप से भारी संख्या में आम भक्तों उपस्थित के अतिरिक्त अरुण चैतन्यपुरी जी महाराज, धर्मप्रकाश गुप्त डा. श्यामबाबू गुप्त, निर्मलतिवारी, संसद रमेश अवस्थी उमंग अग्रवाल, मुकुन्द मिश्र हरिभाऊ खाण्डेकर, डा. अंगद सिंह, अमिताभ बाजपेयी विधायक, बलजीत सिंह यादव (एडवो), डा० प्रदीप दीक्षित, प्रमोद द्विवेदी, अनिल शर्मा, रवीन्द्र शर्मा, (एडवो) राघव तिवारी, अम्बर त्रिवेदी, अरुण प्रकाश अग्निहोत्री, डा. ओमप्रकाश आनन्द, अवधेश बाजपेई,

संजय कुमार

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