सराफा कारोबारियों पर आयकर सर्वे दूसरे दिन भी जारी, करोड़ों की टैक्स चोरी का खुलासा

कानपुर। शहर के दो बड़े और पुराने सराफा कारोबारियों के छह ठिकानों पर आयकर विभाग का सर्वे गुरुवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। बिरहाना रोड, लाल बंगला, किदवई नगर, नयागंज, आनंदपुरी और काजी खेड़ा स्थित प्रतिष्ठानों व आवासों पर की गई जांच में व्यापक स्तर पर हेराफेरी सामने आई है। सर्वे के दौरान बरामद स्टॉक और कारोबारी रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया। आयकर विभाग के अनुसार बिरहाना रोड, लाल बंगला और किदवई नगर स्थित एक कारोबारी के ठिकानों से करीब 12 करोड़ रुपये का माल अधिक मिला, जबकि नयागंज और आनंदपुरी में जांच के दौरान लगभग छह करोड़ रुपये का अतिरिक्त स्टॉक सामने आया है। इससे करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी का अनुमान लगाया जा रहा है।

बुधवार दोपहर शुरू हुई यह कार्रवाई गुरुवार देर रात तक चलती रही, जिसमें 50 से अधिक आयकर अधिकारी लगाए गए हैं। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों कारोबारियों ने बड़ी मात्रा में खरीद-बिक्री कैश में की है। साथ ही छोटे-छोटे पर्चों के जरिए लेनदेन दर्ज कर वास्तविक कारोबार छिपाने की कोशिश की गई। व्यापार के अनुपात में खरीद और बिक्री का सही ब्योरा नहीं दिखाया गया, जिससे आयकर विभाग को लंबे समय से नुकसान पहुंचाया जा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक दो दिन से चल रहे सर्वे में लगातार गंभीर खामियां उजागर होने के बाद आयकर विभाग इस कार्रवाई को सर्वे से छापे में तब्दील करने की तैयारी कर रहा है। स्टॉक में करोड़ों का अंतर, कैश लेनदेन की अधिकता और आय के अनुरूप टैक्स न चुकाने जैसे मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया जा सकता है। हालांकि सर्वे कर रही टीम ने इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

सर्वे के दौरान आयकर टीमों ने कागजी दस्तावेजों के साथ-साथ कंप्यूटर, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों में मौजूद रिकॉर्ड की भी गहन जांच की। आय-व्यय, खरीद-फरोख्त और स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों को खंगालते हुए कैश बुक, लेजर और बिक्री रजिस्टर का मिलान जीएसटी और आयकर रिटर्न से किया गया। इन दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए कई ऐसे मामले सामने आए, जिन्हें अब तक छिपाया गया था।

कार्रवाई के दौरान दोनों कारोबारियों के ठिकानों पर काम कर रहीं महिला कर्मचारियों से पूछताछ के बाद उन्हें बुधवार देर शाम घर भेज दिया गया, जबकि पुरुष कर्मचारियों के मोबाइल फोन कब्जे में लेकर उनसे घंटों पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि कारोबारी कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

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