*कानपुर*
*परमट विद्यालय नीलामी पर कोर्ट का संज्ञान*
*बीजेपी पार्षद की याचिका पर सुनवाई शुरू*
*PWD व बेसिक शिक्षा अधिकारी को नोटिस*
*5,424 रुपये में मलबा नीलामी पर गंभीर सवाल*
*एंकर:—कानपुर के परमट क्षेत्र में स्थित एक प्राथमिक विद्यालय की नीलामी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है,,,,बीजेपी पार्षद विकास जायसवाल की शिकायत पर अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू कर दी है,,,,पार्षद ने नीलामी प्रक्रिया को अवैध बताते हुए शिक्षा के अधिकार के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है,,,,क्या नियमों को ताक पर रखकर विद्यालय भवन की नीलामी की गई क्या बच्चों के भविष्य से समझौता हुआ और क्या सबूत मिटाने की कोशिश की गई इन्हीं सवालों के बीच अब यह मामला अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है,,,,फिलहाल अदालत ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है,,,,आने वाली सुनवाई में इस पूरे प्रकरण की परतें खुलने की उम्मीद है,,,,क्या नीलामी प्रक्रिया में अनियमितता हुई क्या शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हुआ और क्या प्रशासन पर कार्रवाई होगी विद्यालय की नीलामी पूरी तरह नियमों के खिलाफ की गई है,,,,बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है,,,,बिना वैकल्पिक व्यवस्था के स्कूल भवन को गिराया गया और मलबे की कीमत भी बेहद कम दर्शाई गई। हमने न्यायालय का दरवाजा इसलिए खटखटाया है,,,,ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों पर कार्रवाई हो*।
*वीओ:—कानपुर के परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय की नीलामी अब कानूनी विवाद में घिर गई है,,,,बीजेपी पार्षद विकास जायसवाल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है,,,,कि विद्यालय की नीलामी पूरी तरह अवैध तरीके से की गई। उनका कहना है,,,,कि न तो वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया और न ही तकनीकी मानकों को ध्यान में रखा गया। पार्षद का आरोप है,,,,कि विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों के लिए किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में यह सीधे तौर पर शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है,,,,अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रतिवादी बनाते हुए नोटिस जारी किया है,,,,और जवाब तलब किया है,,,,मामले में नया मोड़ तब आया, जब कोर्ट की कार्यवाही के दौरान ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालय भवन को ध्वस्त करने के आदेश पुनः जारी कर दिए गए। इससे पूरे घटनाक्रम पर और भी सवाल खड़े हो गए हैं,,,,यह मुद्दा विधान परिषद में भी गूंजा, जहां संबंधित समिति ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया। आरोप है,,,,कि समिति द्वारा संज्ञान लिए जाने के महज दो दिन के भीतर ही विद्यालय भवन में तोड़फोड़ शुरू करा दी गई, ताकि समिति के सामने सच्चाई आने से पहले ही साक्ष्य समाप्त किए जा सकें। इतना ही नहीं, कोर्ट में दाखिल शपथपत्र में यह उल्लेख किया गया कि विद्यालय में कोई बच्चा अध्ययनरत नहीं है,,,,जबकि स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है,,,,कि बच्चे वहां पढ़ रहे थे। सबसे बड़ा विवाद उस नीलामी राशि को लेकर है,,,,जिसमें विद्यालय से निकले मलबे—ईंट, सरिया और गेट आदि—की कीमत मात्र 5,424.30 रुपये दर्शाई गई। पार्षद का आरोप है,,,,कि यह राशि वास्तविक कीमत से बेहद कम है,,,,और इसमें मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अब पूरे मामले में अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं*।
