उर्स सय्यद फरीदुल हसन चिश्ती मनाया गया
अली अली करना रफ्जियत नहीं ब्लकि इबादत है – अब्दुल सत्तार हशमती
महान सूफी हजरत सय्यद फरीदुल हसन चिश्ती का सालाना 6 वां उर्स मुबारक कानपुर नगर में शानों शौकत से मनाया गया। बड़ी संख्या में उनके मुरीदों के अलावा स्थानीय अकीदतमन्द लोग सय्यद साहब के मानने वाले उर्स में पहुंचे। उर्स का समापन कुल शरीफ की फातिहा नजरों नियाज़ से हुआ।
इस मौके पर लाल कॉलोनी के मशहुर नातख्वाह हज़रात व राजा ने नात ओ मन्कबत पेश किया। वहीं हाफ़िज़ शमाईल रजा हशमती ने समापन के मौके पर देश में अमन चैन और मुल्क की तरक्की के लिए सामूहिक दुआ की।उर्स के पहले तकरीर प्रोग्राम हुआ। जिसमें हाफ़िज़ अब्दुल सत्तार हशमती साहब ने जबरदस्त तकरीर फरमाई। तकरीर में सत्तार साहब ने कहा कि हर हाल में अहले बैत और मौला अली का ज़िक्र ज़रूरी है और अली का नाम लेना ज़िक्र करना सब इबादत है.. और नबी ने ये फरमा दिया है कि अली सारे जहाँ के मौला है, नबी करीम का ये इरशाद कि जिसका मैं मोहम्मद मौला हूँ, उसके अली मौला है के माने ये हुए कि आदम से लेकर ईशा तक यहां तक के कयामत तक के हर मोमिन के मौला मोहम्मद है तो अली भी उसके मौला हुए। तो पता ये चला कि अली अली करना रफ्जियत नहीं ब्लकि इबादत है। वहीं अन्य शायर हाफिज करीम ने कलाम पढ़े। जिन्होंने सूफियाना कलाम से महफिल में समा बांधा। दिलशाद चिश्ती ने बताया उर्स मुबारक 2021 से हर साल मनाया जाता है और दूर दूर से अकीदतमन्द पहुंचे।उर्स, कमेटी अंजुमन चिश्तिया ने खाने का इंतजाम किया और इश्हाक अली ने उर्स की मुबारकबाद दी। आखिर में समापन पर कमेटी की जानिब से लंगर बांटा गया।
