*उत्तरीपुरा धान क्रय केंद्र पर डीएम का छापा, लापरवाही पर क्रय केंद्र प्रभारी के निलंबन की संस्तुति*
*किसानों की शिकायत पर कार्रवाई, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित*
*जिला खाद्य विपणन अधिकारी को शिथिल पर्यवेक्षण के लिए प्रतिकूल प्रविष्टि*
कानपुर नगर।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने आज अपराह्न नवीन मंडी स्थल, उत्तरीपुरा में स्थापित चार धान क्रय केंद्रों की हकीकत परखी तो किसानों की शिकायतें सही मिलीं। कई दिनों से धान बेचने के लिए चक्कर लगा रहे किसानों का क्रय नहीं हुआ था। मंडी में खाद्य विभाग द्वारा संचालित उत्तरीपुरा मंडी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय तथा यूपीएसएस द्वारा संचालित एक क्रय केंद्र स्थापित है।
निरीक्षण के दौरान ग्राम मदाराराय गुमानपुर निवासी श्याम बाबू, ग्राम सुजावलपुर निवासी सरोज नारायण त्रिपाठी और ग्राम एइमा निवासी रामपाल ने डीएम से सीधे शिकायत की कि कई दिनों से प्रयास के बावजूद उनका धान नहीं खरीदा जा रहा है।
डीएम ने उत्तरीपुरा मंडी तृतीय क्रय केंद्र के प्रभारी नीरज मिश्रा और मंडी क्रय केंद्र प्रभारी अमित द्विवेदी से पूछताछ की, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। किसान श्याम बाबू ने बताया कि वह दिसंबर से धान बेचने के लिए प्रयासरत हैं, किंतु उनका क्रय नहीं हुआ। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताते हुए विपणन निरीक्षक नीरज शर्मा के निलंबन हेतु शासन को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
अभिलेखों की जांच में यह भी सामने आया कि यूपीएसएस द्वारा संचालित क्रय केंद्र पर 12 फरवरी के बाद धान की खरीद नहीं हुई, जबकि किसान मौजूद थे। साथ ही 14 नवंबर के बाद किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण न किए जाने पर भी डीएम ने नाराजगी जताई।
धान खरीद की समग्र जांच के लिए एसडीएम बिल्हौर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। एआरओ सप्लाई और मंडी सचिव समिति के सदस्य होंगे।
निरीक्षण के दौरान मंडी परिसर में गंदगी पाई गई, जिस पर प्रभारी मंडी सचिव अनिल पांडेय को फटकार लगाते हुए तत्काल सफाई सुनिश्चित कराने को कहा गया। खरीदा गया धान भी खुले में रखा मिला। डीएम ने निर्देश दिए कि धान को सुरक्षित ढंग से संरक्षित किया जाए, ताकि वर्षा की स्थिति में नुकसान न हो।
जिलाधिकारी ने जिला खाद्य विपणन अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश भी दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि क्रय केंद्र पर आने वाले सभी किसानों का धान नियमानुसार खरीदा जाए और छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जाए। यदि किसानों को अनावश्यक दौड़ाने की शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई तय मानी जाए।
