
वी.एस.एस. डी. कॉलेज के हिंदी विभाग की स्थापना के शताब्दी वर्ष पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन
हिंदी विभाग की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म महाविद्यालय, कानपुर तथा हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 23–24 फरवरी 2026 को द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। संगोष्ठी का विषय — “समकालीन हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता का राष्ट्र-निर्माण में योगदान”।
उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. नीरू टंडन ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता युग-सत्य को एक दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज में चेतना का विस्तार करता है और पत्रकारिता उसे जन-जन तक पहुँचाती है।
विषय-प्रवर्तन करते हुए प्रो. राकेश शुक्ला ने हिंदी विभाग के सौ वर्ष के गौरवशाली इतिहास का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने विभाग की समृद्ध परंपरा, पूर्व आचार्यों के योगदान, शोध-साधना और राष्ट्रीय स्तर पर विभाग की प्रतिष्ठा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व की पुनर्स्मृति का अवसर है।
मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित पत्रकार- संपादक एवं पूर्व सांसद श्री तरुण विजय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्य में राष्ट्रीयता के गुण निहित होते हैं। स्वतंत्रता से पूर्व पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया और स्वतंत्रता के पश्चात राष्ट्र-निर्माण की दिशा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता वर्तमान की सक्रिय अभिव्यक्ति है, जबकि साहित्य दीर्घकालीन सांस्कृतिक दृष्टि प्रदान करता है। दोनों के मूल में ‘विचार’ की शक्ति निहित है, जो राष्ट्र को दिशा देती है।
कॉलेज प्रबंध समिति (BOM) की सचिव सीए नीतू सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी साहित्य हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का आधार है। ऐसे शैक्षणिक आयोजन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय दृष्टि, बौद्धिक परिपक्वता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए प्रख्यात साहित्यकार प्रो. ओम निश्चल ने कहा कि ज्ञान के क्षेत्र में संकोच बाधा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुंदर वह व्यक्ति नहीं जो स्वयं को सुंदर बताता है, बल्कि वह है जो दुनिया को सुंदर बना देता है। साहित्य समाज के निर्माण और परिष्कार का सशक्त माध्यम है।
प्रथम तकनीकी सत्र में “राष्ट्रीयता की अवधारणा एवं साहित्य और पत्रकारिता” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आए प्रो संतोष भदौरिया ने बुद्ध और गांधी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सह-अस्तित्व, समन्वय और संवाद की संस्कृति है। भारतीयता विविधताओं में एकता की भावना से ओत-प्रोत है।
द्वितीय तकनीकी सत्र “समकालीन पत्रकारिता एवं साहित्य : वैचारिक लेखन” विषय पर केंद्रित रहा। वक्ताओं श्री राजेंद्र राव, डॉ. शिव कुमार दीक्षित, डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता से पहले पत्रकारिता ने राष्ट्रीय चेतना को स्वर दिया और स्वतंत्रता के बाद सामाजिक चुनौतियों एवं समकालीन यथार्थ को अभिव्यक्त किया। साहित्य और पत्रकारिता दोनों ही समाज में विचार-सृजन की मूल शक्तियाँ हैं।
सत्रों का संचालन प्रो. आनंद शुक्ला एवं डॉ. नीलिमा सिंह ने किया तथा आभार ज्ञापन निदेशक- स्ववित्त पोषित विभाग डॉ. अंशु सिंह सेंगर द्वारा प्रस्तुत किया गया।
यह संगोष्ठी हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका पर गंभीर, विचारोत्तेजक एवं सार्थक विमर्श का प्रभावी मंच सिद्ध हुई।
आयोजन में अनेक महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे ।
