पोस्ट बजट मेमोरेंडम के लिए आयकर बार ने दिए विस्तृत सुझाव, कर प्रणाली को सरल व न्यायसंगत बनाने पर जोर

कानपुर। कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन द्वारा , आयकर भवन सिविल लाइंस में तृतीय राजकोषीय कानून अनुसंधान चर्चा का आयोजन किया गया। एसोसिएशन ने प्री-बजट मेमोरेंडम के रूप में अपने सुझाव भारत सरकार को प्रेषित किए थे। बजट प्रावधानों की घोषणा के बाद आयोजित बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श कर पोस्ट-बजट मेमोरेंडम हेतु अतिरिक्त एवं संशोधित सुझावों को अंतिम रूप दिया गया।

सीए धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि संकलित प्रस्तावों को भारत सरकार को पोस्ट-बजट मेमोरेंडम के रूप में भेजा जाएगा, जिससे कर प्रणाली अधिक व्यावहारिक एवं न्यायसंगत बन सके। बैठक में एमएसएमई को देरी से भुगतान पर करारोपण प्रावधानों की समीक्षा की आवश्यकता बताई गई तथा कर कानूनों में दंड को शुल्क में परिवर्तित करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उचित कारण सिद्ध होने पर शुल्क में राहत का स्पष्ट प्रावधान करने की मांग की गई। सदस्यों ने कर स्लैब की निरंतरता बनाए रखने, निवासी व्यक्तियों के लिए मूल कर-मुक्त सीमा पाँच लाख रुपये निर्धारित करने तथा लोकप्रिय कटौतियों को समेकित कर एकल मानक कटौती की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया। साथ ही प्री-फिल्ड रिटर्न का दायरा बढ़ाने, छोटे करदाताओं को सीधे नोटिस से संरक्षण देने और छोटे कर विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए सेटलमेंट विंडो शुरू करने की मांग रखी गई।

वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े सुझावों में ईमानदार क्रेता को इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित न करने, नोटिस की डाक के माध्यम से अनिवार्य सेवा, पुराने मामलों के लिए विशेष एमनेस्टी योजना, जोखिम आधारित ऑडिट चयन, सीमित परिस्थितियों में ऑडिट, रिटर्न संशोधन की समयसीमा बढ़ाने तथा अपीलों में पूर्व जमा राशि और अपीलीय शुल्क कम करने की सिफारिश की गई।

गोष्ठी के मॉडरेटर सीए दीप कुमार मिश्र ने कहा कि प्रस्तुत सुझाव उद्योगों, व्यापारियों और करदाताओं को वास्तविक राहत देंगे तथा अनुपालन की जटिलताओं को कम करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट प्रदीप कुमार द्विवेदी ने की, संचालन महामंत्री सीए शरद सिंघल ने किया तथा धन्यवाद उपाध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव ने दिया। बैठक में अमिताभ सिंह, राजीव कुमार गुप्ता, अरविन्द नाथ सिंह, दिलीप तिवारी, शैलेन्द्र सिंह, अवधेश मिश्र, सुशील निगम, आशीष जौहरी, संतोष गुप्ता, प्रवीण भार्गव, पवन गुप्ता, जगदीश साहू, विनोद सिंह सचान, महेंद्र स्वरूप निगम, यश शुक्ल, प्रदीप पाण्डेय, आनंद सिंह, मनीष गुप्ता, शैलेन्द्र सचान, रवि पसान, शशि भूषण दीक्षित, शिव गोपाल गुप्ता और प्रेम गुप्ता सहित अनेक सदस्यों ने अपने विचार एवं सुझाव प्रस्तुत किए।

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