भारतीय हितों की आकांक्षा के साथ सूफी खानकाह एसोसिएशन ने नए ईरानी सुप्रीम लीडर को लिखा पत्र।
कानपुर। भारत के सूफियों के अग्रणी संगठन सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन द्वारा ईरान के नव निर्वाचित सुप्रीम लीडर आयत उल्लाह सय्यद मुज्तबा अली हुसैनी ख़ामनाई को शुभकामना देते हुए,भारतीय हितों की आकांक्षा के साथ पत्र लिखा है,नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के द्वारा प्रेषित किए गए अंग्रेजी और फारसी भाषा में लिखे गए पत्र में सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन द्वारा दोनों देशों के मध्य सदियों से स्थापित सूफ़ी सांस्कृतिक संबंधों का हवाला देते हुए,नव निर्वाचित ईरानी सुप्रीम लीडर से भारतीय हितों के सकारात्मक संरक्षण की आकांक्षा की गई है,इस संबंध में केंद्रीय कार्यालय कानपुर नगर से बयान जारी करते हुए, सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी मोहम्मद कौसर हसन मजीदी ने कहा कि सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन के लिखे पत्र में हमने लिखा है कि,ईरानी रहबर ए इंकलाब आयत उल्लाह हजरत सय्यद अली खामनेई की शहादत जो कि तमाम आलम ए इंसानियत के लिए नाकाबिले बर्दाश्त नुकसान है,इस महान दुःख के अवसर पर शहीद रहबर ए इंकलाब की बारगाह में खिराजे अकीदत पेश करते हुए,सय्यद मुज्तबा अली हुसैनी जी को ईरानी इस्लामी जम्हूरिया का रहबर ए मोअज्जम चुने जाने पर हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि हम भारत के सूफियों के अग्रणी संगठन सूफ़ी खानकाह एसोसिएशन की जानिब से ईरानी सुप्रीम लीडर महोदय को याद दिलाना चाहते हैं कि,भारत और ईरान के सदियों पुराने रिश्तों में सबसे मज़बूत रिश्ता मौला अली अलैहिस्सलाम और तमाम आइम्मा अहले बैते अतहार की निस्बत हमें एक करती है, उन्होंने कहा कि इसके अलावा भारतीय सूफी परंपरा का ईरान के साथ सदियों पुराना मज़बूत रिश्ता रहा है, सिलसिला ए चिश्तिया के अज़ीम रूहानी पेशवा हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती संजरी अजमेरी ख्वाजा ग़रीब नवाज़ हों या और दूसरे बुजुर्ग सूफिया इकराम,इन सबका ईरान,ईरानी तहज़ीब,ईरानी भाषा और साहित्य के साथ सदियों से ताल्लुक रहा है।
उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सदियों पुराने रिश्तों को आपकी कयादत और सरपरस्ती में ईरान की जानिब से और मजबूती मिलेगी,हमे यकीन है कि सय्यद मुज्तबा अली खामनेई साहब की कयादत में हमारे प्यारे वतन भारत के साथ ईरानी संबंधों को और भी अधिक मजबूती मिलेगी।
