**यूपी एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट का तीन दिवसीय सम्मेलन संपन्न**

 

**कानपुर, 14 मार्च 2026:** जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर के फिजियोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित यूपी एसोसिएशन ऑफ फिजियोलॉजिस्ट (यूपी एसोसिकॉन 2026) के तीसरे और अंतिम दिन विभिन्न रोचक और ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए। इस तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय “फिजियोलॉजी एट इंटरफेस व्हेयर डिसिप्लिन्स मीट” (वह सेतु जहाँ विभिन्न विषय मिलते हैं) रहा।

 

सम्मेलन के अंतिम दिन आज सुबह 9 बजे प्रथम सत्र की शुरुआत हुई, जिसमें संगोष्ठी (सिम्पोजियम) में डॉ. अरुण गोयल ने “सामुदायिक स्वास्थ्य, न्यूरोफिजियोलॉजी और एबीपीएम में फिजियोलॉजी की प्रासंगिकता” विषय पर अपने विचार रखे।

 

तत्पश्चात, डॉ. राजेश कथरोटिया ने “द इमोशनल ब्रेन: न्यूरल सर्किट एंड इट्स कोरिलेशन” (भावनात्मक मस्तिष्क: तंत्रिका परिपथ और उसका सहसंबंध) विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने “सर्केडियन रिदम एंड इम्युनिटी” (जैविक घड़ी और प्रतिरक्षा) विषय पर महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।

 

डॉ. शिवेंद्र वर्मा ने “ऑटोनॉमिक डिसफंक्शन एंड एंडोक्राइनोलॉजी” (स्वायत्त शिथिलता एवं अंतःस्राव विज्ञान) विषय पर व्याख्यान दिया।

 

अपराह्न से शुरू हुए सत्रों की श्रृंखला में डॉ. सीमा सिंह ने के चंद्र नमस्कार अभ्यास के प्रति हृदय की स्वायत्त गतिविधि का शारीरिक प्रतिक्रिया” विषय पर व्याख्यान सह प्रदर्शन (डीओएपी) सत्र आयोजित किया। इसके बाद डॉ. अरविंद कंचन ने “क्लिनिकल फिजियोलॉजिस्ट एज न्यूरल सेफगार्ड्स: मल्टीमॉडल आईओएनएम इन कॉम्प्लेक्स न्यूरोलॉजिकल प्रोसीजर्स” (जटिल तंत्रिका संबंधी प्रक्रियाओं में तंत्रिका सुरक्षा हेतु बहु-विधि आईओएनएम की भूमिका) पर प्रकाश डाला।

 

अंतिम सत्र में डॉ. दीप्ति द्विवेदी ने “पेडागॉजिकल पैराडाइम शिफ्ट: एम्ब्रेसिंग न्यूअर टेक्निक्स इन कॉम्पिटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन” (योग्यता-आधारित चिकित्सा शिक्षा में नई तकनीकों को अपनाना: एक शैक्षणिक प्रतिमान बदलाव) विषय पर अपना विचार रखा।

 

सम्मेलन का समापन शाम भव्य समापन समारोह (वैलिडेटरी फंक्शन) और सामान्य सभा की बैठक के साथ हुआ।

 

इस आयोजन में मुख्य संरक्षक डॉ. संजय काला, आयोजन अध्यक्ष डॉ. डॉली रस्तोगी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन सचिव डॉ. अतोष कुमार ने बताया कि सम्मेलन में डॉ. जयवर्धन सिंह, डॉ. प्रीति कनौजिया और डॉ. दुर्गेश कुमार सहित पूरी टीम ने इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस सम्मेलन ने फिजियोलॉजी के क्षेत्र में नवीनतम शोध और शिक्षण पद्धतियों पर विस्तृत चर्चा का एक सशक्त मंच प्रदान किया।

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