मैदान पर ‘कब्जे’ की कोशिश नाकाम! यूनियन नेता के नेतृत्व में खिलाड़ियों के गुस्से के आगे झुके ओएफसी के अधिकारी, बिना भूमि पूजन के वापस लौटना पड़ा

 

ओएफसी बोर्ड ke अधिकारियों द्वारा खेल के मैदान पर क़ब्ज़े के चलते इसका विरोध प्रदर्शन यूनियन नेता निर्भय शंकर सिंह के नेतृत्व में काफ़ी संख्या में लोगो द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया।

 

कानपुर के अरमापुर क्षेत्र में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (SAF) के पास स्थित वर्षों पुराने स्पोर्ट्स ग्राउंड पर कथित निर्माण को लेकर आयुध निर्माणी बोर्ड (OFC) के अधिकारियों में सीएमडी उमेश सिंह,सीजीएम राजीव शर्मा,एडमिन अफसर सुरेश पति यादव,द्वारा भूमि पूजन की तैयारी की गई। जैसे ही इसकी भनक खिलाड़ियों में फैडरेशन और यूनियन के नेता छविलाल यादव,अवधेश दीक्षित,पंचरत्न सिंह,राजेश शाह स्थानीय लोगों को लगी, सैकड़ों की संख्या में लोग मैदान पर जुट गए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।प्रदर्शनकारियों ने साफ आरोप लगाया कि यह मैदान अरमापुर क्षेत्र का इकलौता बड़ा खेल मैदान है, जहां रोजाना दर्जनों खिलाड़ी अभ्यास करते हैं और कई प्रतिभाएं यहीं से निकलकर आगे बढ़ी हैं। उनका कहना है कि इस मैदान को कॉम्प्लेक्स में बदलने की कोशिश सीधे-सीधे खेल संस्कृति को खत्म करने की साजिश है।खिलाड़ियों का यह भी दावा है कि मैदान के रखरखाव और उपयोग के लिए समय-समय पर उनकी टीम द्वारा भुगतान भी किया जाता रहा है, ऐसे में बिना सहमति और कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद निर्माण की पहल करना पूरी तरह अवैध और मनमानी है।जैसे-जैसे विरोध बढ़ता गया, माहौल तनावपूर्ण हो गया। हालात को काबू में करने के लिए तुरंत दो थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात की गई। अरमापुर थाना प्रभारी मनोज पांडेय भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।हालांकि, खिलाड़ियों और स्थानीय जनता का आक्रोश इतना जबरदस्त था कि आखिरकार अधिकारियों को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा और बिना भूमि पूजन किए ही मौके से लौटना पड़ा।यह पूरा घटनाक्रम शहर में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या ओएफसी ke अधकारियों द्वारा खेल विकास को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा,कानपुर के खेल मैदानों को खत्म किया जा रहा है?अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या खिलाड़ियों को उनका मैदान सुरक्षित मिल पाएगा या नहीं।

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