मध्य पूर्व में युद्ध का असर: कच्चे माल और गैस संकट से उद्योग प्रभावित
कानपुर। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब शहर के उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे माल और कॉमर्शियल गैस की कमी के कारण कई औद्योगिक इकाइयों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर बुधवार को कोआपरेटिव इस्टेट सभागार में उद्यमियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें उद्योगों के सामने खड़ी जटिल समस्याओं और उनके संभावित समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि युद्ध की विभीषिका के कारण कच्चे माल और गैस की आपूर्ति में भारी कमी आ गई है, जिससे कानपुर का औद्योगिक ढांचा चरमराने लगा है। उन्होंने बताया कि उद्योगों को न तो पर्याप्त मात्रा में गैस मिल पा रही है और न ही कच्चा माल उपलब्ध हो पा रहा है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है। वर्तमान स्थिति में करीब 50 प्रतिशत फैक्ट्रियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि 30 प्रतिशत इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। शेष 20 प्रतिशत फैक्ट्रियां भी अपनी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं कर पा रही हैं और केवल 70 से 80 प्रतिशत क्षमता पर ही काम चल रहा है।
उद्यमियों ने कहा कि इस संकट का सबसे अधिक असर श्रमिकों पर पड़ रहा है। कई उद्योग नियमित रूप से श्रमिकों को रोजगार और वेतन देने में असमर्थ हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि श्रमिक वर्ग अपने बच्चों की स्कूल फीस तक भरने में कठिनाई महसूस कर रहा है और उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
बैठक में यह भी चिंता जताई गई कि इस कठिन समय में भी उद्योगों पर हाउस टैक्स, वाटर टैक्स, बिजली बिल और जीएसटी की वसूली के लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। जब फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं और उत्पादन प्रभावित है, तब इस प्रकार की सख्त वसूली नीति उद्योग और व्यापार के लिए और अधिक परेशानी पैदा कर रही है।
उद्यमियों ने सरकार से मांग की कि उद्योगों के अस्तित्व को बचाने के लिए अवैध कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उद्योगों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाए, जिससे संकटग्रस्त औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित किया जा सके और वे फिर से देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे सकें। बैठक में बलराम नरूला, हरीश ईसरानी, सुशील मोहन टकरू, संदीप मल्होत्रा, निखिल गुप्ता, एन.के. गुप्ता, रमेश गुलाटी और दिनेश कुशवाहा सहित कई उद्यमी उपस्थित रहे।

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