*अवध में जन्मे हैं रघु रइया…घर – घर बाजे बधाइयां….*

 

 

•मर्यादित जीवन के कारण राम बने मर्यादा पुरुषोत्तम।

 

•धर्म ,कर्तव्य, त्याग श्रीराम के मुख्य आभूषण।

 

नरवल। भगवान श्रीराम को उनके मर्यादित जीवन,सत्य,त्याग धर्म,कर्तव्यों को सच्चाई से निर्वहन करने के कारण ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कहा जाता है।श्री रामनवमी पर्व पर श्री राम के प्राकट्योत्सव का वर्णन करते कथा वाचिका देवी रजनी चंद्रिका गोस्वामी ने बधाई भजन “अवध में जन्मे है रघु रइया, घर घर बाजे बधाईयां” में श्रोता भक्त मंत्रमुग्ध हो कर खूब नाचे।

 

श्री चतुर्भुज मंदिर सरसौल में आयोजित श्री शिव पुराण कथा में सातवीं व अंतिम संध्या में

नवरात्रि की पावन नवमी तिथि को श्री चतुर्भुज मंदिर विकास समिति के तत्वाधान में आयोजित श्री शिवमहापुराण कथा यज्ञ में कथा वाचिका देवी रजनी चंद्रिका गोस्वामी ने आहुक,आहुका,महादेव के व्रतों की विधि,फल एवं महत्व, नरक के प्रकार,मृत्यु के चिन्ह,सूत जी द्वारा विदा लेना की कथाओ का भावनात्मक श्रवण श्रोताओं को कराते हुए कथा पांडाल को भक्ति रस से परिपूर्ण कर दिया।

कथा के अंत में भक्तों को महाप्रसाद रूपी रुद्राक्ष वितरित किए गए।

 

शुक्रवार को सुबह कन्या पूजन कर कन्या भोज कराया गया जहां अन्य भक्तों ने भी प्रसाद ग्रहण किया।

इस दौरान श्री चतुर्भुज मंदिर को सजाया गया। जहां भक्तों ने पूजा अर्चना की।

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