29 मार्च 2026 को पद्मश्री गिरिराज किशोर स्मृति संस्थान व अनुष्टुप संस्था द्वारा पद्मश्री गिरिराज किशोर के पत्रों के संकलन की पुस्तक कुछ अशके जिगर का लोकार्पण गिरिराज किशोर जी के सत्या भवन शूटरगंज में किया गया वरिष्ठ लेखक प्रियंवत द्वारा संकलित एवं संपादित तकरीबन 700 पत्रों का यह पुस्तक आधारित ग्रंथ गिरिराज किशोर की जिजीविषा व साहित्य सेवा का जीवंत प्रमाण है जिसे संभावना प्रकाशन द्वारा छापा गया है यह पुस्तक न सिर्फ तमाम साहित्यकारों के साथ गिरिराज किशोर जी के संबंधों की अंतर कथा है बल्कि उसे दौर के साहित्यिक समाज और उसके गतिविधियों का एक अहम दस्तावेज भी है साहित्य के विद्यार्थियों के लिए यह किताब उस दौर के साहित्य और लेखकों को समझने का एक अहम दस्तावेज साबित हो सकती है साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित हुआ प्रियंवद द्वारा संपादित गिरिराज किशोर रचना संचयन का लोकार्पण भी इसी कार्यक्रम में किया गया इस पुस्तक में गिरिराज जी के विपुल लेखन भंडार में से कुछ महत्वपूर्ण कहानीया लेखों समीक्षाओं स्मरणों और एक नाटक केवल मेरा नाम लो वह लगभग 75 पृष्ठ की उपन्यास असलाह को शामिल किया गया है ।यह उनके संपूर्ण लेखन की एक झांकी है ।इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार इन पुस्तकों के संपादक प्रियंवद ने कहा कि गिरिराज किशोर क लेखन गहन रचनात्मक और सृजन के प्रति अकंपित आस्था का प्रतीक है उनका पूरा लेखकीय जीवन सहजता विनम्रता और कृतज्ञता की अनोखी मिसाल है अपने समय और समाज से जुड़कर वह निष्प्रह और समर्पित भाव से लेखन मे सक्रिय रहे उनके जीवन में साहित्य के अलावा कुछ नहीं था वह इसी को औढते थे बिछाते थे साहित्यकारों के बीच उनका मन रमता था अपने समकालीनों में अज्ञेय नरेश मेहता शैलेश मटियानी ज्ञान रंजन और राजेंद्र यादव से उनके आत्मीय संबंध रहे उनके साथ हुए पत्राचार के कई दशकों की रचनाशीलता की पहचान और परख की जा सकती है। की गिरिराज किशोर की पत्नी श्रीमती मीरा किशोर ने प्रियंवत को धन्यवाद करते हुए कहा कि हजारों की संख्या में पड़े पत्रों के जखीरा को एक खूबसूरत किताब में संकलन देने का इतना बड़ा काम सिर्फ वही कर सकते थे इसलिए इन पत्रों में उल्लेखनीय कई घटनाओं की वह खुद साक्षी भी है गिरिराज जी अपनी साहित्य साधना के साथ-साथ अपने समकालीनों के आधे वक्त में उनके साथ खड़े मिलते थे और इस पुस्तक में संकलित कई पत्र इस बात की तस्दीक करते हैं । गिरिराज किशोर जी की पुत्री शिवा ने धन्यवाद आए हुए आगंतुकों को ज्ञापित किया कार्यक्रम का संचालन भावना मिश्रा ने किया कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अनु किशोर शहीद नकवी दीपक मालवीय सुरेश गुप्ता अनीता मिश्रा आनंद शुक्ला खान फारुक आशीष त्रिपाठी शशि कौशिक पंखुड़ी विनीता शशि सिंह आदि प्रमुख थे

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