विश्व स्वास्थ्य दिवस पर बच्चों को नशे के रोग से बचाने को सामूहिक प्रयास का आवाहन

 

कानपुर भारत में कैंसर से होने वाली बच्चों की मौत के मामले बेहद चिंताजनक स्थिति में है देश में साल 2023 में कैंसर से 17000 बच्चों की मौत हुई जो विश्व में सर्वाधिक है हमारे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है लालसेंट कमिशन आंन एडोलिसेंट हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार साल 2030 तक दुनिया भर में लगभग एक अरब से अधिक किशोर ऐसे देश में रह रहे होंगे जहां डिप्रेशन, अवसाद,मोटापा और गंभीर चोटें उनके जीवन के लिए बड़ा खतरा बनी रहेगी, उपरोक्त बात सोसाइटी योग ज्योति इंडिया व हिंदू जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय अटल आरोग्य संघ के सहयोग से नशा मुक्ति युवा भारत थीम पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी शीर्षक भविष्य के रोगों के अंधकार से बचपन को बचाएं पर अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान के प्रमुख,एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरू ज्योति बाबा ने कहीं,श्री श्री ज्योति बाबा ने आगे कहा कि रिपोर्ट में इन समस्याओं का जिक्र है जिन्हें सही समय पर रोका जा सकता है लेकिन यदि ध्यान ना दिया गया तो यह 2030 में विकराल रूप ले लेंगे। इनमें प्रथम है नशा के चलते मानसिक स्वास्थ्य का संकट, रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक लाखों स्वस्थ जीवन वर्ष केवल मानसिक विकारों की भेंट चढ़ सकते हैं, इसमें इंटरनेट मीडिया का दबाव, एंजायटी पर्यावरण को लेकर चिंता और बढ़ती प्रतिस्पर्धा बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। दूसरे नंबर पर है मोटापा एक ओर जहां कुछ क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या अभी बरकरार है वहीं जंक फूड और निष्क्रिय जीवन शैली के कारण मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है श्री श्री ज्योति बाबा ने जोर देकर कहा कि तीसरा और सबसे खतरनाक है सुरक्षा,दुर्घटनाएं और हिंसा। सड़क दुर्घटनाएं और आपसी हिंसा आज भी इस आयु वर्ग 10- 24 वर्ष में मृत्यु के प्रथम कारणों में शामिल हैं। हिंदू जागरण मंच के पीयूष मिश्रा सनातनी ने कहा कि आज साइबर बुलीइंग जैसे डिजिटल खतरे भी बच्चों की सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। राष्ट्रीय अटल आरोग्य संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अतुल कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि जनसंख्या 2070 तक 11.7 से 12.4 अरब के बीच पहुंचती है तो इसके गंभीर पर्यावरणीय परिणाम हो सकते हैं इससे वैश्विक तापमान में वृद्धि, कार्बन उत्सर्जन में बढ़ोतरी और परिस्थितिकी तंत्र पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है,परिणाम स्वरुप करोड़ों लोग बीमारियों के जाल में फंस सकते हैं। डॉक्टर आर सी शर्मा ने कहा कि वे डॉक्टर वंदनीय है जो की आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं बल्कि दवाओ और जांच का खर्च उठाकर स्वास्थ्य सेवाओं को मानवीय बनाते हैं।

लखनऊ से डॉक्टर धर्मेंद्र यादव ने कहा की सेवा,संवेदना और समर्पण जहां होता है वहां बीमारी ठहरती नहीं है, वहां तो बस स्वास्थ्य का चेहरा मुस्कुराता है। हेल्थ एक्टिविस्ट सुश्री गीता ने कहा कि उन डॉक्टर को नमन है जो कि अस्पताल में इलाज कराने वालों को न केवल भरोसा सम्मान के साथ सकारात्मक ऊर्जा देते हैं बल्कि उनके इलाज व दवाइयां के खर्चे में सहयोग भी करते हैं।

मयंक त्रिपाठी सोशल एक्टिविस्ट ने कहा कि स्वास्थ्य केवल उपचार नहीं बल्कि संवेदना,विश्वास और मानवीय जुड़ाव का समग्र रूप है संगोष्ठी का संचालन साकेत सिंह, संचालन उपेंद्र मिश्रा व धन्यवाद डॉ अतुल कुमार मिश्रा ने दिया।

अंत में श्री ज्योति बाबा ने सभी को नशा मुक्ति युवा भारत हेतु संकल्प भी कराया। अन्य प्रमुख स्वास्थ्य प्रेमी डॉक्टर सुलोचना दीक्षित, राकेश गुप्ता,उमेश शुक्ला इत्यादि थे।

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