तस्करों से मुठभेड़ में शहीद हुए जवान शैलेंद्र दुबे के अंतिम दर्शन

कानपुर बंगाल के मालदा में तस्करों से मुठभेड़ में शहीद हुए जवान शैलेंद्र दुबे के अंतिम दर्शन को उनके घर नौबस्ता मछरिया में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। कैबिनेट मंत्री से लेकर इलाके के हजारों लोग अंतिम दर्शन को पहुंचे। इसके बाद भैरव घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। चार साल के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। बातचीत के दौरान पिता ने कहा बेटे की शहादत पर मुझे गर्व है। बेटे ने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर की है। अपने पोते को भी सेना में अफसर बनाऊंगा।
शहीद बीएसएफ के जवान शैलेद्र दुबे का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर रात उनके घर पहुंचा। सुबह उनके अंतिम दर्शन को इलाके के हजारों लोग पहुंचे। सिर्फ पत्नी मीनू, पिता संतोष, मां रानी और दोनों बच्चे ही नहीं वहां पहुंचे हजारों लोगों की तिरंगे से लिपटे शहीद को देखकर आंखे नम हों गई। कोई भी खुद को रोक नहीं सका और आंखों से आंसू छलक पड़े। कैबिनेट मंत्री सतीश महाना समेत अन्य जन प्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर पुष्प अर्पित कर श्रृद्धांजलि दी। इसके बाद भैरव घाट पर अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर रवाना हुआ। इस दौरान शैलेंद्र दुबे अमर रहें…जब तक सूरज चांद रहेगा, शैलेंद्र भइया का नाम रहेगा…। भीड़ ने नारे भी लगाए। बीएसएफ की जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उनको अंतिम विदाई दी। पुलिस और प्रशासनिक अफसर भी भैरव घाट पर पहुंचे। चार साल के बेटे शिवांश ने चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।
शहीद शैलेंद्र का पार्थिव शरीर पहुंचते ही घर-परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी, मां और पिता रोते-रोते बेसुध हो गए। बेटे शिवांश और बेटी शिवांशी भी पिता को देखकर रोने लगे। इसी बीच शिवांशी ने कहा कि पापा बोल क्यूं नहीं रहे…हम लोग आपका कब से इंतजार कर रहे थे…। यह सुनकर वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें डबडबा गई। परिवार के लोगों ने पत्नी, पिता और बच्चों को किसी तरह संभाला।
शैलेंद्र की शहादत पर बीएसएफ के अफसरों ने परिवार के लोगों को बताया कि वह पश्चिम बंगाल के मालदा में नाव से गश्त के दौरान अनियंत्रित होकर नदी में गिर गए। इससे उनका निधन हो गया। जबकि साथी जवानों ने फोन पर बताया कि तस्करों से मुठभेड़ हो गई और उन्होंने शैलेंद्र की नदी में डुबोकर हत्या कर दी। रायफल लूटकर भाग निकले। इस पर परिजनों का कहना है कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बेटे ने देश के लिए जान दी है।

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