न्याय विद सैयद अहमद खान के 204वें जन्म दिवस पर विचार गोष्ठी

अलीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के 204 वें जन्म दिवस पूरे होने पर शैक्षिक परिचर्चा सम्मेलन के रूप में फिरदौस मेंशन रजवी रोड में एएमयू के छात्र नेता सरताज अनवर की अध्यक्षता में आरंभ हुआ। सरताज अनवर ने गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि अलीगढ़ विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्टूबर सन 1817 को दिल्ली में हुआ था। सर सैयद भारत में शिक्षा के व्याप्त वातावरण पर चिंतित थे तथा अंग्रेजों के जुल्म और अन्याय के खिलाफ भी चिंतित रहते थे अपने चिंतन काल में उन्होंने अपने विचारों से साथियों को बताया था जब तक भारत में शिक्षा के क्षेत्र में अलख नहीं जागे गी तब तक देश के नौजवान अंग्रेजों के षड्यंत्र की चक्की में पिसता रहेगा इसलिए सर सैयद जी ने 24 मई 1875 में अलीगढ़ में मदरसा ए उलुग नाम का एक विद्यालय खोल फिर इसको कॉलेज का रूप दिया और 8 जनवरी 1877 को मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के नाम से इस इमारत की बुनियाद रखी तथा इसके बाद उपरोक्त विद्यालय सन 1921 के विश्वविद्यालय के रूप में प्रतिपादित हुआ और देश में शिक्षा की अग्रणी भूमिका निभाकर नौजवानों को शिक्षित होने का मार्ग प्रशस्त किया। इस गोष्ठी में कहा गया कि महान शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान को भारत में शिक्षा के प्रचार प्रसार व शिक्षा की अलख जगाने व शिक्षित समाज बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने हेतु उनके द्वारा की गई सेवाओं को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाए। इस अवसर पर समाज में शिक्षा के लिए फिक्र करने वाले अन्य संभ्रांत व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे।
हाजी इरफान सोलंकी विधायक ने कहा कि सर सैयद अहमद खान इस्लामिक मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा के पक्षधर थे तथा कॉम को शिक्षित करने के लिए उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया।
रियाज अहमद राजू ने कहा कि सर सैयद अहमद खां एक रिफॉर्मर थे हिंदुस्तान में मुसलमानों को सर सैयद की जरूरत है आज इस कॉम में बेहतर भविष्य के लिए यहां ना किसी रहनुमा की जरूरत है ना किसी सियासी फिक्र की जरूरत है अगर कॉम को आगे बढ़ाना है तो केवल सर सैय्यद खा के बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है। फरहान लारी ने कहा कि सर सैयद खान का पत्रकारिता क्षेत्र में पूरा योगदान रहा है 1836 में सैयुद्दल अखबार से शुरू किया गया था तथा पत्र-पत्रिकाओं में लेखन संपादन करके सदैव समाज में फैली हुई कुरीतियों को समाप्त करने तथा शिक्षा देने का अभियान चलाया।
सिराज हुसैन ने कहा एएमयू हिंदुस्तानी मुसलमानों की आरजू और तमन्नाओं का केंद्र है।
डॉ नूरी शौकत ने कहा कि सर सैयद के मिशन को आगे बढ़ाएं बेटे और बेटियों की शिक्षा में कोई फर्क ना करें सर सैयद में बेटियों की शिक्षा के लिए बहुत ही साहसिक कदम उठाया था।
डॉ जमाल अंसारी ने कहा कि सर सैयद भले ही हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका मकसद और कारनामे उनकी उम्मीदें और उनकी वसीयत और उनका असासा धरोहर आज हमारे बीच मौजूद है।
गोष्ठी का संचालन वरिष्ठ नेता रियाज अहमद राजू ने किया तथा गोष्ठी में सर्वश्री हाजी इरफान सोलंकी, हाजी सरताज अनवर, के के शुक्ला, बंटी सेंगर, फरहान लारी, सिराज हुसैन, नूरी शौकत, डॉ जमाल अंसारी, हसन रूमी, गुड्डन बादशाह, राशिद अलीग, तारिक नजीर,नफीस अहमद, मोहम्मद नसीम खान, रिजवान सोलंकी, राजेश कठेरिया, जुबेर अनवर,मुनीब अनवर आदि उपस्थित रहे।

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