खाद की किल्लत पर मुख्य सचिव नाराज, जिला कृषि अधिकारी से जवाब तलब

कानपुर देहात के अफसर जिले में खाद का स्टॉक होने का चाहे लाख दावा करें, लेकिन अधिकांश जगहों में सूनी पड़ी सहकारी समितियां हकीकत जाहिर करने के लिए काफी हैं।

झींझक रूरा सहित जिले भर में डीएपी का टोटा बना हुआ है। ऐसे में किसान परेशान हैं। अमर उजाला के मुद्दा उठाने पर मुख्य सचिव ने इसका संज्ञान लिया है। अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक) ने जिला कृषि अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

रबी सीजन में राई, सरसों, आलू सहित अन्य फसलों की बुआई के लिए जिले के किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी नहीं मिल पा रही है। किसान हर रोज खाद की आस लिए सहकारी समितियों में पहुंचते हैं।

पूरा दिन इंतजार करने के बाद उन्हें सिर्फ मायूसी हाथ लगती और बैरंग लौटने को मजबूर होते हैं। समितियों में खाद न होने का फायदा निजी दुकानदार उठाते हुए कालाबाजारी करने में जुटे हुए हैं। मजबूरन किसान मनमाने दाम चुकाने को मजबूर होते।
बीती 21 अक्तूबर को अमर उजाला ने झींझक ब्लॉक की नौ साधन सहकारी समितियों में खाद न होने से किसानों की परेशानी का मुद्दा उठाया था। जिसका मुख्य सचिव ने संज्ञान लिया है। उनके स्टाफ आफीसर डॉ. अमित कुमार ने अपर मुख्य सचिव को जांच कर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी के निर्देश पर संयुक्त कृषि निदेशक उर्वरक अनिल कुमार पाठक ने जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता को नोटिस जारी किया है। उन्होंने मामले की जांच करते हुए रिपोर्ट तलब की है। मुख्य सचिव स्तर से रिपोर्ट तलब करने से गुरुवार को अफसरों में हड़कंप की स्थिति है।

संयुक्त कृषि निदेशक (उर्वरक) की ओर से दी गई नोटिस पर छानबीन की गई। जिसमें पाया गया कि जीएसटी नंबर न होने के कारण समितियों में समय से खाद नहीं भेजी जा सकी। यह चूक सहायक निबंधक के स्तर से हुई है। जिलाधिकारी ने कृषि, पीसीएफ व सहकारिता अधिकारियों को बुलाकर समितियों में खाद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। झींझक ब्लॉक की चार समितियों में खाद भेज दी गई है। चार अन्य में जल्द ही खाद भेज दी जाएगी। एक समिति बंद चल रही है। – उमेश कुमार गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी

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