76 वर्षीय वृद्धा को 12 साल बाद मिली जेल से रिहाई तो फूली नहीं समाई, पढ़िए- फुलिया की दर्दनाक दास्तां
Tue, 10 Nov 2021
फतेहपुर जेल की चहारदीवारी में 12 बरस जिंदगी काटने वाली फुलिया की रिहाई का फरमान आया तो आंखों में खुशी दिखाई दी। जेल प्रशासन ने भी 76 वर्षीय वृद्धा (कैदी) की रिहाई पर माला पहनाकर विदाई दी। जेल प्रशासन ने बताया कि वृद्धा की रिहाई दो अक्टूबर को होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते रिहाई टल गई थी। वृद्धा की दया याचिका राज्यपाल ने स्वीकार की थी।
हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रही वृद्धा फुलिया की दया याचिका स्वीकार होने पर शासन के निर्देश पर 12 वर्ष बाद सोमवार देर शाम जेल प्रशासन ने शाल व फूल माला पहनाकर हमेशा के लिए रिहा कर दिया। इससे खुशी से वृद्धा का चेहरा खिल गया और खुशीपूर्वक अपने भतीजे के साथ घर चली गई। जेल अधीक्षक मो. अकरम खान ने बताया कि दो अक्टूबर के उपलक्ष्य में वृद्धा की रिहाई के लिए भेजी गई दया याचिका को राज्यपाल ने स्वीकार कर ली। शासन के निर्देश पर सोमवार को वृद्धा को फूलमाला पहनाकर रिहाई कर दी गई। पैनल अधिवक्ताओं में मो. साबिर, इश्तियाक अहमद ने 50 हजार रुपये का निजी मुचलका जेल अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया। वृद्धा को उसका भतीजा कुंवर सिंह घर ले गया है।
रिहाई बाद वृद्धा फुलिया ने बताया कि 20 वर्ष पूर्व पति की मौत हो गई थी। उसकी इकलौती बेटी दुलारी की भी मौत हो गई। गनपतपुर गांव में अब उसका कोई नहीं है और न ही संपत्ति बची है, उसकी एक आंख भी खराब है। वह अपने भतीजे कुंवर सिंह लोधी के घर बरईखुर्द, थरियांव में रहेगी। उल्लेखनीय है कि हुसेनगंज थाने के गनपतपुर निवासी वृद्धा फुलिया पत्नी भिखुवा को हत्या का आरोप सिद्ध होने पर 30 जुलाई 1982 को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। एक माह बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। इसके बाद 11 फरवरी 2010 को हाईकोर्ट ने भी उम्रकैद सजा बरकरार रखी। इस तरह दो अक्टूबर 2021 तक वृद्धा ने 12 वर्ष 01 माह छह दिन की सजा काटी। इससे पहले कोरोना संक्रमण को लेकर उसे 60 दिन के पैरोल पर छोड़ा गया l
