इटावा जिले में चंबल नदी का किनारा विदेशी मेहमानों से गुलजार है। हजारों मील लंबी दूरी तय करके विदेशी साइबेरियन मेहमान पक्षी चंबल नदी सेंचुरी में आना शुरू हो गए हैं। सुबह के समय नदी के तटों पर पक्षियों के कलरव लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। चंबल सेंचुरी क्षेत्र में विदेशी पक्षियों के आने की आहट मिलते ही सतर्कता बढ़ा दी गई है। नवंबर माह के मध्य से फरवरी माह के आखिर तक बड़ी तादाद में चंबल नदी के किनारे विभिन्न प्रजातियों के दुर्लभ पक्षियों का आगमन होता है। मौसम अनुकूल होने के कारण इस काल को प्रजनन के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है। नदी किनारे विदेशी मेहमान पक्षी प्रजनन के उपरांत अंडों से बच्चों को जन्म देते हैं। मौसम में गर्मी आने से पहले अपने बच्चों को साथ लेकर वापस लौट जाते हैं। इन विदेशी मेहमानों की रखवाली के लिए नदी किनारे कॉम्बिग बढ़ा दी है।
सर्दी शुरू होते ही ठंडे प्रदेशों के लगभग 4 से 5 हजार पक्षी प्रत्येक वर्ष चंबल नदी किनारे आते हैं। इन पक्षियों के आते ही नदी किनारे मनोहारी दृश्य पक्षियों के कलरव से देखने को मिलता है। पक्षियों की अठखेलियां लोगों को मंत्रमुग्ध करती हैं । इन पक्षियों को देखने के लिए लोग प्रातः काल भरेह संगम की ओर पहुंचते हैं।
लोग नदी की सुनसान रेत में बैठकर घंटों इन पक्षियों की अठखेलियों में खो जाते हैं। मलेशिया, साइबेरिया, रूस जैसे ठंडे देशों से यह पक्षी लंबी दूरी तय करके आते हैं। चंबल सेंचुरी क्षेत्र की नम भूमि इन पक्षियों के प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
इटावा: चंबल नदी के किनारे विदेशी मेहमानों ने आना शुरू
इन देशों में बर्फ पड़ने से पक्षियों के सामने प्रजनन व खाने-पीने की समस्या आती है। जिसके कारण वे चंबल क्षेत्र में आ जाते हैं। यहां भोजन-पानी के साथ प्रजनन की अनुकूलता होती है। साइबेरिया के पक्षी 2000 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर सात समुंदर पार यहां आते हैं। इस दूरी को तय करने में उन्हें एक महीने का समय लगता है।
इन प्रजातियों के आते हैं पक्षी
रूडी शेलडक, पेंटेड स्टार्क, विसलिंग टील, ब्लैक आइबिस, बार हेडेड गीज, ब्लैक नेक्ड स्टार्क, पेलेसिस गल, टेल टिंगो, कार्बोनेट आदि पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। ये पक्षी दिसंबर शुरू होते-होते हजारों की संख्या में नदी किनारे डेरा जमा लेते हैं। सेंचुरी वन दरोगा चकरनगर विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया कि नदी में मेहमान पक्षियों की आवक के चलते सतर्कता बढ़ा दी गई है। पिछले वर्ष लगभग 4 हजार से अधिक पक्षियों की आवक का अनुमान लगाया गया था। इस वर्ष इनकी संख्या में बढ़ोतरी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह विभाग के लिए बहुत ही खुशी का विषय है।
विदेशी मेहमानों ने आना शुरू, सेंचुरीविभाग रख रहा है ख्याल
चंबल सेंचुरी क्षेत्राधिकारी चकरनगर हरि किशोर शुक्ला बताते हैं कि दीपावली से आगमन शुरू हो जाता है। यह पक्षी हजारों किलोमीटर का सफर तय करके चंबल नदी में प्रजनन की अनुकूलता के चलते यहां पर आते हैं। पक्षियों की रखवाली के लिए सहसों घाट से लेकर भरेह संगम तक निरंतर रखवाली की जा रही है। पक्षियों के ठहराव में किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
