जिनमें भारत की आजादी का ऐसा जुनून कि अपना नाम अबुल कलाम गुलाम मुहीउद्दीन से बदल कर अबुल कलाम आजाद कर लिया और जिन्होने मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान के सिद्धांतों का विरोध कर हिन्दू – मुस्लिम एकता का जोरदार समर्थन किया। भारत के ऐसे महान सपूत, स्वाधीनता के अमर सेनानी, भारत रत्न मौलाना अबुल कलाम आजाद के चरणों में हम कांग्रेस के लोग अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर गौरवान्वित महसूस करते है। यह विचार शहर कांग्रेस कमेटी कानपुर उत्तर के अध्यक्ष नौशाद आलम मंसूरी ने आज तिलक हाल में आयोजित मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती पर पुष्पांजलि सभा में व्यक्त किए।
इस अवसर पर श्री मंसूरी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उसूलों और सिद्धांतों पर आजीवन चलने वाले मौलाना आजाद स्वाधीनता संग्राम के उन अग्रणी नेताओ मे से थे जिन्होंने 1905 में बंगाल विभाजन का जोरदार विरोध किया था और आल इंडिया मुस्लिम लीग की विभाजनकारी नीति के विरोध में देश भर में अभियान चलाया था।
उन्होंने ने यह भी कहा कि उनकी इस्लामी शिक्षा का आलम यह था कि आमतौर पर जो शिक्षा 25 साल की उम्र में हासिल की जाती है. उसे महज 16 साल की उम्र में ही हासिल कर इतिहास, दर्शन, गणित, फारसी, उर्दू, हिन्दी, बंगाली, अरबी और अंग्रेजी दुनियां के चोटी के विद्वानो की कतार में खड़े नजर आने लगे। मौलाना आजाद के देश के प्रति महान योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
प्रमुख रूप से शंकर दत्त मिश्र, पूर्व विधायक संजीव दरियाबादी, दिलीप शुक्ला, हाजी वसीक, प्रमोद जायसवाल, आमोद त्रिपाठी, अंकज मिश्रा, दिलीप बाजपेई, जियाउर्रहमान अंसारी, समी इकबाल, पदम मोहन मिश्रा, जीशान अंसारी, कमल जायसवाल, किरन गुप्ता, चन्द्रमणि मिश्र, लल्लन अवस्थी, इम्तियाज रईस, अमिताभ दत्त मिश्र, नमिता कनौजिया, नीरज द्विवेदी, विशाल सोनकर, आशुतोष शुक्ला, महेन्द्र कुमार, इदरीश अहमद, चेतन मौर्या, मो0 आमिर, राजकुमार कुशवाहा, प्रिंस सोनकर, रामजी दुबे, सुधीर साहू व महताब आलम आदि शामिल थे।
2021-11-11
