कानपुर के ग्वालटोली थाना क्षेत्र के कटरी स्थित लुधवाखेड़ा गांव के मजरा चैनपुरवा में शनिवार शाम बच्चों के खेल में दो किसानों की झोपड़ियों में आग लग गई। जिससे भगदड़ मच गई। आसपास के लोगों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने के प्रयास किए, लेकिन जब तक आग बुझ पाती दोनों गृहस्थियां जलकर राख हो गई। अब दोनों परिवार पेट की आग शांत करने और सिर छिपाने के लिए मोहताज हैं।
कटरी के चैनपुरवा में शनिवार को मोहल्ले के बच्चे खेल रहे थे। खेल के दौरान अचानक नीलम की झोपड़ी में आग लग गई। लपटें निकलने पर जानकारी हुई तो वह शोर मचाते हुए बाहर की ओर भागी। जब तक मोहल्ले के लोग कुछ समझ पाते आग की लपटों ने बगल में किसान बबलू की झोपड़ी को भी चपेट में ले लिया। ऊंची लपटों को देखकर बस्ती के लोगों ने बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। जब तक आग बुझी तब तक दोनों गृहस्थियां राख हो चुकी थीं। मामले की जानकारी होने पर ग्राम प्रधान निर्मला सिंह बेटे रवि संग वहां पहुंची और दोनों परिवार के लिए कुछ अनाज व सामान की व्यवस्था करा राजस्व विभाग को घटना की जानकारी दी।
पहले बाढ़ ने बर्बाद किया, जो बचा था वह आग ने जला दिया: नीलम के घर में रखा पांच कुंतल गेंहू, साइकिल समेत अन्य सामान जल गया। जबकि बबलू के यहां मवेशियों का 15 कुंतल भूंसा और अन्य सामान जल गया। नीलम ने नुकसान के बारे में पूछने पर फफक पड़ी। डबडबाई आंखे और कांपते होठ उसकी लाचारी बयां कर रहे थे। नीलम का कहना था कि तिनका-तिनका जोड़कर, पेट काट कर किसी तरह गृहस्थी जुटाई थी। जो कुछ था सब बाढ़ में बर्बाद हो गया। जो कुछ बचा पाए थे उसे आग ने जला दिया। अब तो न सिर छुपाने का ठिकाना बचा न ही पेट की आग बुझाने के लिए अनाज।
