आज ककवन स्थित धान क्रय केन्द्र पर जब ब्लाॅक प्रमुख प्रतिनिधि किसानों की शिकायत पर केन्द्र पर पहुंचे तो वहाँ की स्थिति देख वह भी हैरान रह गये। मामला आज सुबह ककवन के सरकारी धान क्रय केन्द्र का है। सुबह के 11:30 बजे का वक्त था यह जब प्रमुख जी निरीक्षण हेतु यहाँ पहुँचे। ककवन का धान क्रय केन्द्र ब्लाॅक प्रमुख आवास की जर्जर इमारत को बनाया गया है। इसी इमारत में 1 नवम्बर से शुरू हुई धान की खरीद की गई अभी तक की मात्र 150 बोरियाँ ही हैं। जिनका अभी तक उठान नहीं किया गया है। जब कोई किसान धान बिक्री हेतु आता है तो उसे यही परिसर दिखा स्टाॅक फुल होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। जिस जर्जर भवन में अभी यह क्रय किया गया धान भण्डारण किया गया है वह इतनी जर्जर है कि किसी भी वक्त धराशायी हो सकती है तथा आजकल मौसम विभाग की जो भविष्यवाणी है उस हिसाब से यदि मौसम खराब होने से बारिश हुई तो यह सारा खरीदा गया धान भीगकर बर्बाद हो जायेगा। जिम्मेदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अभी 11:30 बजे तक कोई भी कर्मचारी धान क्रय केन्द्र पर उपस्थित नहीं मिला तथा फोन किये जाने पर किसी का फोन बन्द मिला तो किसी ने रिसीव ही नहीं किया।
यह स्थिति प्रदेश सरकार के किसानों से रिकार्ड धान खरीद की जाने की पोल खोल रही हैं।
मौके पर धान क्रय केन्द्र प्रभारी का अता-पता नहीं है। यह स्थिति किसानों की दुर्दशा बयाँ करने को काफी हैं। ककवन क्षेत्र जो तहसील का सबसे ज्यादा धान उत्पादक क्षेत्र है जब इसकी यह दुर्दशा है तो बाकी जगह का इससे अंदाज लगाया जा सकता है। ककवन ब्लाॅक में बहुत कम क्रय केन्द्र होना भी एक बड़ी समस्या है। प्रदेश व देश की खुशहाली तभी संभव है जब हमारे गाँव का किसान खुश हो। किसानों की आय दुगुनी सिर्फ हवाई बातों से नहीं होगी इसके लिए धरातल पर काम दिखना जरूरी है।
यह स्थितियां मात्र इस वर्ष कि नहीं है अपितु प्रत्येक वर्ष किसानों को इन समस्याओं से दो चार होना पड़ता है।
क्रय केन्द्रों की इस दशा के रहते मजबूरीवश किसान क्षेत्र में सक्रिय बिचौलिए को अपनी महँगी लागत पानी से उगाई फसल को औने-पौने दामों में बेच रहे हैं।
2021-12-02
