कानपुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के कानपुर आगमन पर यातायात रोकने से लगे जाम में फंसी कार में सवार बीमार महिला उद्यमी वंदना मिश्रा की अस्पताल ले जाते समय मौत होने पर पुलिस आयुक्त ने माफी मांगी है। शनिवार की सुबह पुलिस कमिश्नर ने ट्विटर पर घटना के लिए माफी मांगी और मातहतों के साथ महिला उद्यमी के घर पहुंचकर शोक संवदेना व्यक्त की। उन्होंने शोकाकुल परिवार से बातचीत करके ढांढस बंधाया।
किदवई नगर निवासी महिला उद्यमी वंदना मिश्रा पिछले कई दिनों से बीमार थीं। कोरोना संक्रमित होने के बाद रिपोर्ट नेगेटिव आ गई थी लेकिन उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही थी। शुक्रवार को उनकी तबीयत खराब हुई और उल्टियां शुरू हो गईं। इसके बाद पति शरद मिश्रा कार से उन्हें लेकर रीजेंसी अस्पताल ले गए। डॉक्टर को दिखाने के बाद वह घर वापस आ गई थीं लेकिन शुक्रवार की शाम को अचानक तबीयत फिर से खराब हो गई। घर वाले उन्हें कार से दोबारा रीजेंसी अस्पताल लेकर जा रहे थे। गोविंदपुरी पुल पर उनकी कार जाम में फंस गई। स्वजन का आरोप है कि पुलिस कर्मियों को बीमारी के बारे में जानकारी दी लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति के आगमन का हवाला देते हुए रोक दिया। जाम खुला और वह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने वंदना को मृत घोषित कर दिया।
सुबह घटना जब पुलिस आयुक्त असीम अरुण के संज्ञान में आई तो उन्होंने पुलिस कमिश्नरेट के अधिकृत ट्विटर अकाउंट पर माफी मांगी। उन्होंने लिखा- आइआइए की अध्यक्ष बहन वंदना मिश्रा जी के निधन के लिए कानपुर नगर पुलिस और व्यक्तिगत रूप से मैं क्षमा का प्रार्थी हूं। भविष्य के लिए यह बड़ा सबक है। हम प्रण करते हैं कि हमारी रूट व्यवस्था ऐसी होगी कि न्यूनतम समय के लिए नागरिकों को रोका जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।
पुलिस कमिश्नर असीम अरुण, डीसीपी यातायात बीबीजीडीएस मूर्ति, डीसीपी साउथ रवीना त्यागी समेत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ महिला उद्यमी के घर पहुंचे। उनके पति शरद मिश्रा व घरवालों से बात करके ढांढस बंधाया। पुलिस आयुक्त ने सभी के सामने घटना को लेकर शोकाकुल परिवार के सामने खेद व्यक्त किया। उन्होंने दोहराया कि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। इसके लिए रणनीति बनाई जाएगी। बीते वर्षों में कई बार ऐसा हो चुका है जब वीवीआइपी मूवमेंट के चलते जाम में फंसे बीमार की मृत्यु हुई हो। हालांकि इस तरह की घटनाओं पर चर्चा हुई लेकिन पुलिस की तरफ से कभी कोई पहल नहीं की गई। लेकिन, पहली बार कमिश्नरेट पुलिस ने इस तरह की पहल कर आम लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की है कि आगे से इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी।
