डॉक्टर सुशील की पत्नी चंद्र्रप्रभा और उनके दो बच्चों की हत्या से गोगूमऊ गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई

कानपुर के कल्याणपुर स्थित डिविनिटी होम्स अपार्टमेंट में डॉक्टर सुशील की पत्नी चंद्र्रप्रभा और उनके दो बच्चों की हत्या से गोगूमऊ गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई। एक साथ तीनों की चिताएं जलीं तो वहां मौजूद हर आंख से आंसू छलक उठे। चंद्रप्रभा गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधान अध्यापिका थीं। करीब डेढ़ दशक से यहां तैनात थीं। शनिवार को विद्यालय में शोकसभा के बाद एक दिन का अवकाश कर दिया गया। ग्राम प्रधान विकास कटियार ने बताया कि चंद्रप्रभा ने वर्ष 2003 में बतौर सहायक शिक्षिका के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था, फिर यहीं प्रधान अध्यापिका बन गई थीं। खंड शिक्षा अधिकारी अमरनाथ ने बताया कि प्रधान अध्यापिका 25 दिन के बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) पर थीं।उच्च प्राथमिक विद्यालय गोगूमऊ में चंद्रप्रभा के अलावा सहायक अध्यापक दीपक सिंह, मनीषा, प्रीति गुप्ता व दो रसोइया रेखा व कंचन देवी काम करतीं थी। सहकर्मियों ने बताया कि चंद्रप्रभा बेहद मिलनसार स्वभाव की थीं। पूरे स्टाफ के साथ परिवार की तरह व्यवहार करती थीं।हत्यारोपी डॉ. सुशील के बड़े भाई अमृत लाल भास्कर ने बताया कि सुशील कुछ समय से डिप्रेशन में था। उसका इलाज रामा मेडिकल कॉलेज में ही चल रहा था। पति का इलाज कराने के लिए पत्नी चंद्रप्रभा ने स्कूल से अवकाश ले रखा था। अमृत लाल के अनुसार चंद्रप्रभा खुद उन्हें साथ लेकर डॉक्टर के पास दिखाने ले जाती थी।पोस्टमार्टम के बाद तीनों शवों को जैसे ही बाहर लाया गया, चीखपुकार मच गई। बाहर जमा दोनों पक्षों के परिजनों की आंखें नम हो गईं। जैसे ही तीनों शवों से कफन हटाए गए, सभी के आंसू छलक पड़े। चंद्रप्रभा की मां बेटी के शव से लिपटकर बोलीं ‘इतनी हैवानियत से मेरी बेटी को मार डाला, जल्लाद को जरा भी तरस नहीं आया’। इसके बाद शवों को भैरव घाट ले जाया गया। शवों को मुखाग्नि डॉक्टर के बड़े भाई डॉक्टर सुनील कुमार ने दी।घटना के दिन बिना छुट्टी लिए गायब रहे डॉ. सुशील कुमारडॉ. सुशील कुमार ने जिस दिन अपनी बेटे-बेटी और पत्नी की हत्या की थी, उस दिन वे बिना बताए ड्यूटी से गायब थे। डॉ. सुशील रामा मेडिकल विश्वविद्यालय के फोरेंसिंक विभाग के अध्यक्ष हैं। कल्याणपुर पुलिस की टीम शनिवार को विश्वविद्यालय पहुंची और उनके व्यवहार के संबंध में जानकारी जुटाई। पुलिस अधिकारियों ने डॉ. सुशील के सहकर्मियों से बातचीत की। यह पता लगाने की कोशिश की गई कि घटना के पहले उनका बर्ताव कैसा था? इसके अलावा व्यक्तिगत जीवन के तनाव और उनके मिजाज के बारे में जानकारी जुटाई गई। पुलिस अधिकारियों को विवि के निदेशक डॉ. प्रणव सिंह ने बताया कि डॉ. सुशील शुक्रवार को ड्यूटी पर नहीं आए और न ही अवकाश लिया था। पुलिस अधिकारियों ने मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पंकज प्रांजुल से भी उनके संबंध में जानकारी ली।

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