कानपुर देहात पुलिस की बर्बरता

कानपुर देहात पुलिस की बर्बरता, धरने पर बैठे स्वास्थ कर्मी की पुलिस ने कि बेरहमी से सरेराह पिटाई

उत्तर प्रदेश पुलिस भले ही अपनी कार्यशैली के लिए खुद की पीठ थपथपाते नजर आती हो लेकिन कानपुर देहात से एक ऐसी तस्वीर निकल कर सामने आई है जिसने पुलिसिया कार्यशैली पर तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं ताजा मामला जनपद के जिला अस्पताल का है जहां पर धरने पर बैठे एक स्वास्थ्य कर्मी को पुलिस ने बर्बरता के साथ सरेरा बेरहमी से पीट दिया।
यह तस्वीर है कानपुर देहात के जिला अस्पताल की पहली तस्वीर में साफ तौर से देखा जा सकता है कि कुछ लोग ओपीडी के बाहर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कुछ सेकंड बाद ही यह तस्वीर एक युद्ध में बदल गई सफेद कमीज में भाग रहे इस शख्स को गौर से देखिए और इसके पीछे पीछा करती कानपुर देहात की काबिल पुलिस की दौड़ भी देखिए दरअसल पुलिस से भाग रहे इस शख्स का नाम रजनीश शुक्ला है और यह कानपुर देहात के स्वास्थ्य महकमे में बताओ और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है स्वास्थ विभाग की कुछ समस्याओं को लेकर यह शख्स अपने कुछ साथियों के साथ जिला अस्पताल के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठा हुआ था लेकिन स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने जिले के आला पुलिस अधिकारियों से बात कर इस धरने को खत्म करने के लिए नजदीकी अकबरपुर थाने की पुलिस को बुला लिया देखते ही देखते पुलिस के आते तस्वीरें बदल गई धरने पर बैठे रजनीश शुक्ला को भागते हुए देख पुलिस ने रजनीश को पीछे से जुड़ा लिया और बेरहमी के साथ मारने लगी तस्वीरों में आप साफ़ देख सकते हैं कि कैसे पुलिस बर्बरता की पराकाष्ठा को पार कर रही है पुलिस किस वार को देखकर आप फिल्मों में दिखाई जाने वाली थर्ड डिग्री का अंदाजा यहां पर हो रही पिटाई से लगा सकते हैं एक इंसान को मारने के लिए पुलिस की इतनी लंबी चौड़ी फौज बुलाई गई थी कि मानो यह शख्स किसी धरने पर नहीं बल्कि किसी आतंकी संगठन का सदस्य है पुलिस की ऐसी मार देखकर पास में खड़े हुए हर शख्स को हैरत हो गई लेकिन पुलिस दो पुलिस ही ठहरी वह भला कैसे रहम खाती, पहले इस शख्स को खींचकर पुलिस वाले मारते हुए एक चबूतरे से नीचे उतारते हैं और फिर मारते मारते इसको जमीन पर पटक दिया जाता है जिसके बाद आप देख सकते हैं कि कैसे यह अकबरपुर कोतवाली के कोतवाल साहब इस शख्स की छाती पर बैठकर बर्बरता की हद पार कर रहे हैं तो मैं ही पुलिस के तमाम अधिकारी भी इस पूरे प्रकरण में मूकदर्शक बने रहे क्या किसी धरने को या किसी प्रदर्शन का विरोध करने वाले शख्स के साथ इस तरह की अमन वी व्यवहार की उम्मीद करी जा सकती है इम्तिहान तो तब पार हो गई जब पुलिस की बर्बरता का कहर भीड़ में खड़े अस्पताल में आए हुए एक तीमारदार के ऊपर पुलिस की लाठियां बरसने लगी अब गौर से देखिए इस तस्वीर को जिसमें एक शख्स अपनी गोद में मासूम बच्चे को लिए खड़ा है और पुलिस इस शख्स को भी उस धरने का हिस्सा मानकर अपना कहर इस शख्स के ऊपर दिखाने से बाज नहीं आ रही है किस तरीके से लगातार दरोगा जी लाठियों की बौछार कर रहे हैं और वह मासूम इस बात के लिए चिल्ला रहा है कि साहब मैं इनके साथ नहीं हूं हद तो पुलिस ने तब पार कर दी जब अपनी गोद में बच्चे को लिए यह सब मार खाता रहा और पुलिस बच्चे के साथ भी छीना झपटी कर पर बढ़ता करती कैमरे में दिखाई देने लगी इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कानून और कानून का पाठ पढ़ाने वाली जनपद की पुलिस अपराधियों और आम नागरिकों को किस नजर से देखती है जहां एक और अपराधियों के हौसले जनपद में लगातार बुलंद होते जा रहे हैं तो वहीं आम जनता पुलिस की बर्बरता का शिकार बन रही है।
दरअसल कानपुर देहात के जिला अस्पताल में अपनी कुछ मांगों को लेकर जिला अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यूनियन के लोग धरने पर बैठे हुए थे और अपनी मांगों को लेकर लगातार स्वास्थ्य अधिकारियों से चर्चा भी कर रहे थे लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों की बात माने तो आला अधिकारियों के द्वारा उनकी किसी भी मांग को माना नहीं जा रहा था जिसको लेकर आज जिला अस्पताल परिसर के बाहर यह लोग अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे और अपने कार्य को पूर्ण रूप से बंद कर दिया था जिससे करीब 1 घंटे तक ओपीडी कार्य बाधित रहा और मरीजों को भी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा जिसको लेकर स्वास्थ विभाग की सीएमएस वंदना सिंह जिले के जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी को सूचित कर इस पूरे मामले में सहायता मांगी थी 12 लोगों के खिलाफ जो कि जिला अस्पताल में धरना दे रहे थे अकबरपुर कोतवाली में तहरीर भी दी थी और धरने को खत्म कराने के लिए पुलिस की सहायता भी मांगी थी जिसको लेकर जब अकबरपुर कोतवाल की गाड़ी जिला अस्पताल परिसर पहुंची तो वहां पर पुलिस का तांडव शुरू हो गया जिसे देख कर समझ गया और मारपीट में राह चलते राहगीर भी नहीं बचे पुलिस की बर्बरता पुलिस की कार्यशैली और सूझबूझ पर तमाम सवाल खड़े कर रही है तो वही इस बाबत जब हमने स्वास्थ्य की सिम से बात की तो उन्होंने साफ तौर से कह दिया कि उन्हें इस मारपीट की कोई भी जानकारी नहीं है और वह मौके पर मौजूद नहीं थी तुम्हें इस पूरे घटनाक्रम में अकबरपुर तहसील के एसडीएम भी मौजूद रहे लेकिन पुलिस की बर्बरता के आगे वह भी कुछ नहीं कर सके पुलिस लगातार लाठियों पर लाठियां बरसा रही थी और लोग मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे प्रशासनिक अधिकारियों की बात की जाए अधिकारी धरने पर बैठे चतुर श्रेणी कर्मचारी रजनी शुक्ला को कई तरह से दोषी भी मान रहे हैं जिसको लेकर उन्होंने कार्यवाही करने की बात भी स्वीकार की है।

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