देश विरोधी मानसिकता से ग्रसित

उन तत्वों ने दिखाया अपना खतरनाक चेहरा, जिनकी चर्चा जनरल ब‍िप‍िन रावत ने ढाई मोर्चे वाले बयान में की थी

तमिलनाडु के पर्वतीय इलाके में हेलीकाप्टर दुर्घटना में बिपिन रावत उनकी पत्नी मधूलिका रावत और 11 सैन्य अफसरों-कर्मियों के निधन के बाद कई विषाक्त बेहूदी और कुत्सित टिप्पणियों ने बहुत कुछ स्पष्ट कर दिया।
Thu, 09 Dec 2021
सेनाध्यक्ष के बाद देश के पहले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ बने जनरल बिपिन रावत ने कभी कहा था कि भारतीय सेनाएं एक साथ ढाई मोर्चों पर लड़ने में सक्षम हैं। ढाई मोर्चों से उनका आशय चीन और पाकिस्तान के अलावा देश के भीतर छिपे शत्रुओं से था। जब उन्होंने यह टिप्पणी की थी तो कई लोगों ने हैरानी प्रकट की थी और ऐसे सवाल भी उठे थे कि देश के अंदरूनी शत्रुओं को आधे मोर्चे के रूप में परिभाषित करना कितना सही है, लेकिन तमिलनाडु के पर्वतीय इलाके में हेलीकाप्टर दुर्घटना में बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधूलिका रावत और 11 सैन्य अफसरों-कर्मियों के निधन के बाद कई विषाक्त, बेहूदी और कुत्सित टिप्पणियों ने बहुत कुछ स्पष्ट कर दिया।

देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं ये तत्‍व

ये टिप्पणियां फेसबुक, ट्विटर और ऐसे ही अन्य सोशल नेटवर्क साइट पर की गईं। इनमें से कई जनरल रावत के निधन पर खुशी मनाने वाली थीं। आम तौर पर ये कुत्सित टिप्पणियां जहरीली सोच वाले जिहादियों, खालिस्तानियों, अलगाववाद, उग्रवाद, आतंकवाद के दबे-छिपे समर्थकों की ओर से की गईं। इन टिप्पणियों ने यदि कुछ साबित किया तो यही कि जनरल रावत पाकिस्तान, चीन के साथ जिस आधे मोर्चे यानी देश के भीतर छिपे शत्रुओं की ओर संकेत कर थे, वे सचमुच मौजूद हैं और वे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और उनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

सबसे बड़े सैन्य अफसर के निधन पर जताई खुशी

जब देश शोकाकुल था तब आम लोगों के लिए यह जानना- आत्मसात करना अकल्पनीय- अवाक कर देने वाला रहा कि देश में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो सबसे बड़े सैन्य अफसर के निधन पर खुशी प्रकट कर सकते हैं। फेसबुक पर ऐसे तत्व बड़ी संख्या में दिखे। इनमें से कुछ के खिलाफ शिकायतें भी की गईं। राजस्थान के टोंक शहर में जावाद खान नाम के ऐसे ही एक शख्स को गिरफ्तार भी किया गया। कुछ ने पुलिस प्रशासन की कार्रवाई के भय से अपना नाम बदल लिया अथवा अपनी जहरीली टिप्पणियां छिपा लीं

जावाद खान सरीखे कुत्सित तत्वों की संख्या का अनुमान लगाना भले ही कठिन हो, लेकिन इसमें संदेह नहीं कि उन्हें अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि संकट काल में ऐसे लोग शत्रु की भूमिका में आ सकते हैं और देश एवं समाज के लिए खतरा बन सकते हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस प्रमुख विक्रम सिंह का मानना है कि ऐसे खतरनाक तत्वों से पुलिस और प्रशासन के साथ-साथ समाज को भी सचेत रहना होगा।

देश विरोधी मानसिकता से ग्रसित

जनरल रावत के निधन के बाद केवल वैसे ही तत्व नहीं नजर आए, जिन्हें खुद उन्होंने आधे मोर्चे के रूप में रेखांकित किया था। इसके साथ ही ऐसे लोगों के भी चेहरे बेनकाब हुए, जिन्होंने सरकार विरोध और देश विरोध में अंतर करना छोड़ दिया है या फिर सरकार के अंध विरोध में देश विरोधी मानसिकता से ग्रस्त हो चुके हैं। इनमें एक तो कथित तौर पर पूर्व सैन्य अफसर भी निकले। कर्नल बलजीत बख्शी नाम वाले एक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि कर्म लोगों से अपनी तरह से निपटता है। जब उनके इस ओछे ट्वीट की भर्त्सना हुई तो उन्होंने उसे डिलीट कर दिया और उसे लेकर माफी भी मांगी, लेकिन बाद में यह माफी वाला ट्वीट भी डिलीट कर दिया गया।

ओछी मानसिकता का परिचय

कुछ ही देर में ट्वीटर पर हैशटैग ट्रेंड करने लगा। इसका कारण यह था कि कई पाकिस्तानी भी इस हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे थे। थोड़ी देर बाद बलजीत बख्शी अपना ट्विटर हैंडल ही डिलीट कर भाग गया। चूंकि यह ट्विटर हैंडल वेरीफाइड नहीं था, इसलिए यह जानना कठिन है कि यह वाकई में किसी रिटायर्ड कर्नल का था या फिर किसी बहुरूपिए का, लेकिन ऐसा कोई संशय कांग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की समाचार संपादक एशलीन मैथ्यू के बारे में नहीं रहा। उन्होंने अपने वेरीफाइट ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया- डिवाइन इंटवेंशन यानी दैवीय हस्तक्षेप। यह ट्वीट करीब चार बजे किया गया।

जब लोगों ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई और नेशनल हेराल्ड के साथ कांग्रेस को भी घेरा तो उन्होंने यह कुत्सित ट्वीट डिलीट कर दिया और यह सफाई दी कि मेरे एक ट्वीट पर मेरे खिलाफ अभियान छेड़ दिया गया है, लेकिन वह ट्वीट मौजूदा त्रासदी पर नहीं था, फिर भी यदि किसी को दुख पहुंचा हो तो खेद है। एक तरह से उन्होंने खुद ही साबित कर दिया कि उनका टवीट उसी हादसे पर था, जिसमें जनरल रावत और उनकी पत्नी के साथ 11 सैन्य अफसर एवं कर्मी नहीं रहे थे। उनकी माफी किसी ने मंजूर नहीं की। लोगों ने यही कहा कि वह उसी ओछी मानसिकता का परिचय दे रही थीं, जो कांग्रेस देती है।

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