बिकरू कांड: आरोपित पूर्व थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हलका प्रभारी केके शर्मा ने दर्ज कराए बयान, जानिए क्या कहा
बिकरू कांड में तत्कालीन चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हलका प्रभारी केके शर्मा को विकास दुबे का मददगार और राजदार बताते हुए निलंबित कर दिया गया था और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन बयान दर्ज न होने से विभागीय जांच लंबित चल रही थी
Thu, 09 Dec 2021
कानपुर के बिकरू कांड में विकास दुबे के सहयोगी के तौर पर चिन्हित कर जेल भेजे गए तत्कालीन चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हलका प्रभारी केके शर्मा ने आखिर लंबे इंतजार के बाद अपनी बयान दर्ज करा दिए। इन दोनों के बयान न देने की वजह से इनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच रुकी हुई थी। अगर जांच अधिकारी इन दोनों पुलिस अधिकारियों को दोषी मानती है तो इनकी बर्खास्तगी तक हो सकती है। दोनों ने अपने बयानों में विकास दुबे या गैंगस्टर के किसी भी गुर्गे से संबंधों से इंकार किया है।
दो जुलाई 2020 को बिकरू में गैंगस्टर विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर विकास व उसके गुर्गों ने हमला कर सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या कर दी थी। घटना के तीन-चार दिनों बाद ही तत्कालीन चौबेपुर के थानाध्यक्ष विनय तिवारी और हलका प्रभारी केके शर्मा को विकास दुबे का मददगार और राजदार बताते हुए निलंबित कर दिया गया था और दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इस मामले में बाद में एसआइटी जांच हुई तो इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के 37 पुलिसकर्मियों को विकास दुबे का मददगार माना गया और इन पर कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इसमें आठ को वृहद दंड, छह को लघु दंड की संस्तुति है जबकि 23 पुलिसकर्मियों पर जांच के बाद कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। वृहद दंड वाली सूची में चौबपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विनय तिवारी, तत्कालीन हलका प्रभारी केके शर्मा, उपनिरीक्षक अवनीश कुमार सिंह , अजहर इशरत, वीरपाल सिंह, विश्वनाथ मिश्रा के अलावा सिपाही अभिषेक कुमार व राजीव कुमार को आरोपित बनाया गया था।
विनय तिवारी और केके शर्मा ने जेल में रहने का बहाना बनाते हुए विभागीय जांच में बयान दर्ज कराने से इंकार कर दिया था। ऐसे में अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच पूरी कर ली गई थी और इन दोनों पर जांच लंबित थी। सूत्रों के मुताबिक लंबे समय बाद दोनों ने अपने बयान विवेचक को दर्ज करा दिए हैं। दोनों ने विकास दुबे या उसके किसी भी गुर्गे के साथ संबंधों से इन्कार किया है। हालांकि राहुल तिवारी द्वारा लगाए गए आरोपों, मोबाइल से बातचीत के रिकार्ड को लेकर वह कोई उत्तर नहीं दे सके। एडीजी भानु भाष्कर ने जेल में बंद दोनों पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज कराने की पुष्टि की है।

