मंडी शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने अपर जिला अधिकारी श्री अतुल कुमार से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन दिया

कानपुर l उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष श्री मुकुंद मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी के अनुपस्थिति में अपर जिला अधिकारी कानपुर नगर श्री अतुल कुमार से सुबह 11 बजे भेंट कर मंडी शुल्क वापस लेने का ज्ञापन दिया।

प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद स्वरूप मिश्रा ने कहा कि मंडी निदेशक अंजनी कुमार सिंह ने से फोन वार्ता पर उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी मंडी सचिव को आदेशित किया गया है कि मंडी लाइसेंस रिन्यूअल में व्यापारियों को परेशान न किया जाए, पिछले वर्ष को शून्य मानकर लाइसेंस रिन्यूअल में कोई फीस अथवा पेनाल्टी नहीं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन लाइसेंस बनना शुरू हो गए हैं शीघ्र 6 आर व 9 आर व गेट पास ऑनलाइन मिलेंगे, जिसकी लॉगिंग पासवर्ड से गेट पास आप मोबाइल के ऐप में डाउनलोड कर सकते हैं।

कृषि कानून को वापस लेने के बाद प्रदेश में मंडी शुल्क की पुरानी व्यवस्था लागू होने से व्यापारी समाज में जबरदस्त आक्रोश व नाराजगी का वातावरण व्याप्त है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पड़ोसी राज्य बिहार, दिल्ली में मंडी शुल्क नहीं है। राजस्थान में मोटे अनाज पर 50 पैसा सैकड़ा है ऐसी स्थिति प्रदेश में मंडी शुल्क की दरें कम न हुई तो प्रदेश का व्यापार बर्बाद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि बहुत से व्यापारियों ने मंडी लाइसेंस रिन्युअल नहीं कराया हैं ।

नगर अध्यक्ष टीकमचंद सेठिया ने कहा कि व्यापारियों को 6 आर, 9 आर व गेट पास के लिए परेशान होना पड़ेगा, सचल दल प्रभावी होने से इंस्पेक्टर राज व उगाही बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसान अन्नदाता है तो व्यापारी कर देता है जिसकी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नीरज दीक्षित ने कहा कि मेवा सुपारी काली मिर्च आदि अनेक वस्तुएं जिनका उत्पादन प्रदेश में नहीं होता है उन पर मंडी शुल्क वसूलना मंडी अधिनियम का उल्लंघन है व्यापारियों ने ज्ञापन में मांग की, कि व्यापारी हित में 50 पैसा शुल्क मंडी शुल्क लिया जाए।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रांतीय अध्यक्ष मुकुन्द मिश्रा, नगर अध्यक्ष श्री टीकमचन्द्र सेठिया, कोषाध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, नीरज दीक्षित, शेष नारायण त्रिवेदी, कृपाशंकर त्रिवेदी, रामेश्वर गुप्ता, विजय गुप्ता, विराट गुप्ता, राजेश गुप्ता आदि लोग थे।

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