औद्योगिक श्रमिक बस्तियों के अन्तर्गत एक मंजिला, दो मंजिला व बहुमंजिला श्रमिक आवास गृहों का निर्माण भारत सरकार से प्राप्त ऋण एवं अनुदान के द्वारा कराया गया

कानपुर : औद्योगिक श्रमिकों एवं समाज के आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गो के लिए एकीकृत सहायता योजना के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में श्रम विभाग में वर्ष 1952 से वर्ष 1960 तक औद्योगिक श्रमिक बस्तियों के अन्तर्गत एक मंजिला, दो मंजिला व बहुमंजिला श्रमिक आवास गृहों का निर्माण भारत सरकार से प्राप्त ऋण एवं अनुदान के द्वारा कराया गया। उत्तर प्रदेश राज्य में श्रम विभाग के स्वामित्वाधीन 12 क्षेत्रीय कार्यालयों के अन्तर्गत 15 जनपदों मे कुल 29,587 गृह स्थित हैं। उक्त श्रमिक बस्तियों में निर्मित गृहों के बेहतर निस्तारण हेतु एक उचित प्रस्ताव तैयार करने हेतु शासन के पत्र संख्या-925/36-4-2019-02 (म0आ0)/2015 दिनांक 18.09.2019 द्वारा 03 सदस्यीय समिति का गठन निम्नानुसार किया गया:-

1-श्रमायुक्त, उ0प्र0, अध्यक्ष
2-अपर श्रमायुक्त, उ0प्र0 (आई0ए0एस0), सदस्य
3-मुख्यालय स्तर पर तैनात विभागीय अपर श्रमायुक्त, सदस्य
श्रमायुक्त, उ0प्र0/मण्डलायुक्त, कानपुर द्वारा उपरोक्त समिति की बैठक कार्यालय श्रम आयुक्त, उ0प्र0 में आहुत की गयी, जिसमें तत्कालीन श्रमायुक्त द्वारा पूर्व में गठित सलाहकार समिति के सदस्यों से भी विचार-विमर्श किया गया। तत्पश्चात् समिति द्वारा यह मत भी स्थिर किया गया कि श्रमिक बस्तियों के बेहतर निस्तारण एवं प्रबन्धन हेतु एक समुचित प्रस्ताव तैयार कर शासन को प्रेषित किये जाने हेतु व्यापक जनहित में सभी स्टेक होल्डर्स का सहयोग प्राप्त किया जाये तथा इस सम्बन्ध में विषेशज्ञ संस्थाओं का अभिमत भी प्राप्त किया जायेगा। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों में श्रमिक बस्तियों में निर्मित गृहों का निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया गया है, इसका भी अध्ययन किया जायेगा।
इन सभी बिन्दुओं पर गहन विचार-विमर्श के उपरान्त श्रमिक बस्तियों के अन्तर्गत निर्मित गृहों के निस्तारण हेतु एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर शासन को उचित कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जायेगा। इस हेतु शासन द्वारा गठित समिति की आगामी बैठक माह जनवरी, 2022 के द्वितीय अथवा तृतीय सप्ताह में प्रस्तावित है। श्रमायुक्त, उत्तर प्रदेश द्वारा सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि औद्योगिक श्रमिक बस्तियों में स्थित गृहों के सम्बन्ध में सक्षम स्तर से अग्रिम निर्णय लिये जाने तक औद्योगिक श्रमिक बस्तियो के वास्तविक स्वरूप को यथावत रखा जाये।

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