चित्रकूट में तीन दिवसीय हिन्दू एकता महाकुंभ का हर पल पावन व निराला था। वाराणसी समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रचलित राम की शक्ति पूजा मंचन इस बार बुंदेलियों को लुभा गया। हर तरफ वाह-वाह की गूंज के बीच भक्ति से ही शक्ति का मूलमंत्र सीख दर्शकों ने खूब तालियां बजाई। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी कविता राम की शक्तिपूजा का मंचन वाराणसी की नाट्स संस्था रूपवाणी द्वारा किया गया।
मंचन में के जरिए कलाकारों ने उस दृश्य को उभारा जब राम-रावण युद्ध के दौरान श्री राम भी रावण की शक्तियों के आगे असहाय हो गए थे। सेना में निराशा ऐसी फैली की जामवंत व हनुमान जैसे वीरों को पराजय का भय आ गया। श्रीराम ने भी सेना के प्रमुखों से यह कह दिया कि जब रावण को आदि शक्ति मा भगवती ही गोद में लेकर युद्ध कर रहीं हैं तो ऐसे में रावण पर अस्त्र या अचूक मंत्रबाण कारकर नहीं है। उस समय श्री राम ने जामवंत के बताने पर देवी आराधना की। देवी जी ने भी परीक्षा लेने के लिए 108 नीलकमल पूरे होने में बाधा खड़ी तो मर्यादापुरुषोत्म राम ने अपनी नेत्र ही मां को अर्पित करने के लिए तैयार हो गए।
मंच पर ऐसे दृश्य उभरते ही दर्शकों के चेहरे के भाव बनते और बिगड़ते है। मंचन इतना जीवंत था कि दर्शकों के आंखों से आसूं टपकने लगे। मंचन के अंतिम पड़ाव में मां प्रशन्न होती है और विजय का वरदान देकर अंर्तध्यान हो जाती हैं। ऐसी शक्ति उपासना से राम रावण पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। यह देश दर्शकों का ह्दय प्रभुल्लित हो जाता है और पांडाल तालियों की गड़बड़ाहट से भर जाता है। मंचन में राम की भूमिका में स्वाति, सीता और देवी दुर्गा का मंचन नंदिनी द्वारा जबकि लक्ष्मण का किरदार साखी द्वारा निभाया जाता है। संगीत व रचना जे. पी. शर्मा और आशीष मिश्र निभाई जाती है।
रूपवाणी का परिचय: संस्था के संचालक ब्योमकेश बताते हैं कि उनकी संस्था तीस बरस पुरानी है, इसे नये विजन और शिल्प के साथ फिर से निर्मित किया जा रहा है। संस्था ने पहले अखिल भारतीय महिला कवि सम्मेलन और हाल में समकालीन हिन्दी कविता के प्रमुख हस्ताक्षरों के काव्यपाठ आयोजित किये। लोकरंग की अनेक नाट्य प्रस्तुतियां संस्था की पहचान हैं।
