विधानसभा चुनावों की तैयारी में इस समय सभी दल पूरी जीजान लगाए हुए हैं. इन्हीं तैयारियों में भाजपा भी उत्तर प्रदेश में दोबारा फतेह हासिल करने के लिए हर दांव आजमा रही है. इन सबके बीच, पार्टी ने अपने सिटिंग विधायकों की कॉपी को जनता के पैमानों के आधार पर जांचने में जुट गई है. विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने के लिए परीक्षक के रूप में खुफिया को भी लगाया गया है. अब यह परीक्षक लोगों के बीच बैठकर यह पड़ताल करने में जुटे हैं कि जनता के बीच किस विधायक की कैसी छवि है और 2022 के रणक्षेत्र में वह विरोधी पार्टियों के उम्मीदवारों पर कितना भारी या हल्का बैठ सकता है. पीएम मोदी की रैली के पहले इन आंकड़ो को जुटाने का काम भी शुरू हो गया है.2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा किसी प्रकार की कोताही करते हुए नहीं दिख रही है. चूंकि चुनावों में सबसे ज्यादा डर एंटी इनकमबैंसी का होता है, ऐसे में इसी प्रभाव को अब गुपचुप तरीके से परखा जा रहा है. चुनावों से पहले पार्टी में टिकट की चाहत रखने वाले दावेदारों की फौज तो लंबी है लेकिन इस फौज में कौन सा चेहरा, कौन सी सीट पर उपयुक्त होगा, इसको लेकर पार्टी का नेतृत्व बाज की निगाह से देख रहा है. इन सारी तैयारियों में भगवा पार्टी का फोकस अपने सिटिंग विधायकों पर है. इन विधायकों का जनता के बीच कैसा प्रभाव है, इसकी गुपचुप जांच शुरू हो चुकी है. इस काम में खुफिया को भी लगाया गया है.
बात अगर कानपुर की करें और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो यहां की 10 विधानसभाओं पर विधायकों का खुफिया पड़ताल शुरू हो चुकी है. इस पड़ताल में परखा जा रहा है कि विधायकों की अपने क्षेत्र में स्थिति कैसी है. जनता के बीच उनका प्रभाव कैसा है. अपने विधायक कार्यकाल में किसने कितना काम किया है. जातिगत स्थिति में वह किस तरह से फिट बैठता है और विवादों से उसका किस तरह से नाता रहा है. कार्यकर्ताओं को किस तरह से समय और सम्मान दिया गया. इन बिंदुओं पर ही खुफिया अब जानकारी जुटाने में लग गई है. पीएम मोदी के आने से पहले इस जांच को काफी अहम भी माना जा रहा है.
खुफिया के द्वारा की जाने वाली पड़ताल में सबसे ज्यादा महत्व विधानसभाओं में जनता की डिमांड को दिया जा रहा है. जनता किस तरह का चेहरा चाहती है, उसमें कार्य करने से लेकर जातिगत समीकरण को वह किस तरह से देख रही है. विरोधी पार्टी के विधायकों को हराने में किस तरह का चेहरा सक्षम हो सकता है, यह सब जनता की आकांक्षा पर परखे जाएंगे. बता दें कि इसके पहले भाजपा ने जगह जगह पर जन आकांक्षा पेटी लगाकर भी जनता की राय जानने की कोशिश की थी. भाजपा की तैयारियों में इस बार जनता की राय को काफी अहम स्थान दिया जा रहा है. इस पड़ताल में विधायकों का रिपोर्ट कार्ड सामान्य से कम, सामान्य और बेहतर के आधार पर तैयार किया जा रहा है. चर्चा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर ही कानपुर में कुछ विधायकों के टिकट कट भी सकते हैं l
2021-12-27
