राष्ट्रपति जी का अभिनंदन

भारत की यशस्वी माननीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी के पुखराया (कानपुर देहात) आगमन पर सादर समर्पित अभिनंदन – पत्र
कानपुर देहात के गौरव माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी ने अपनी मेधा, कनिष्ठा और सदाचरण के समय की शिला पर उपलब्धियों की नायाब इबारत लिखी है। अपने यश व कीर्ति के द्वारा वे परौंख की मिट्टी की सोंधी खुशबू से सभी दिशाओं को सुभाषित कर रहे हैं।
सामान्य परिवार और परिवेश से जीवन यात्रा आरंभ कर माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी ने अनवरत संघर्ष किए तथा अदम्य साहस के साथ अनगिनत झंझावातों का सामना करते हुए कानून की पढ़ाई पूरी करके सुविज्ञ विधि वेत्ता के रूप में सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के दायित्व का कुशलता पूर्वक निर्वहन किया तथा अपेक्षाकृत कमजोर वर्ग के लोगों के पक्षधर के रूप में अपना सार्थक योगदान दिया।
अपने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और आदर्शों को अपने कार्यों द्वारा मजबूती प्रदान की है। इनका सार्वजनिक जीवन इनके द्वारा राष्ट्र निर्माण की दिशा में किए गए निस्वार्थ समर्पण और त्याग के उदाहरणों से परिपूर्ण है।
राष्ट्र निर्माण तथा समाज कल्याण की भावना से प्रेरित होकर शोषित व पीड़ित जनों की बेहतरी के लिए इनके द्वारा आरंभ किए गए प्रयासों को इनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद और अधिक विस्तार मिला। सच्चे जनप्रतिनिधि के दायित्व का निर्वहन करते हुए इन्होंने जन सरोकार के मुद्दों को संसद में बहुत गंभीरता के साथ उठाया और विचार विमर्श का विषय बनाया। साथ ही जन सेवा हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को समुन्नत बनाने के लिए ये निरंतर प्रयत्नशील रहे।
जब इनको बिहार के राज्यपाल का संवैधानिक दायित्व दिया गया तब राष्ट्र निर्माण के लिए प्रतिबद्धता, सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान और जन सामान्य से संवेदनात्मक जुड़ाव के कारण अपने असाधारण गरिमा के साथ संविधान और विधि का परिरक्षण, संरक्षण और प्रतिरक्षण करते हुए जनता की सेवा और कल्याण में अपना अमूल्य योगदान दिया। बिहार के हर पर्व, त्यौहार तथा सुख दुख में जनता के साथ हमेशा खड़े रहे। इन्होंने बिहार सरकार द्वारा पूर्ण शराब बंदी लागू करने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु 35% विशेष आरक्षण लागू करने की स्वीकृति प्रदान कर बिहार को स्वस्थ, समृद्ध और खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। इनके योगदान के लिए बिहार के निवासी इनके लिए सदैव कृतज्ञता का भाव रखेंगे। बिहार सरकार और केंद्र सरकार के मध्य सुदृढ़ सेतु के रूप में इन्होंने सहकारी संघवाद की व्यवस्था को मजबूत बनाया।
राज्यपाल के रूप में कुशल नेतृत्व का आदर्श प्रस्तुत करते हुए ये भारत के 14वें राष्ट्रपति चुने गए। सर्वोच्च संवैधानिक पद के गुर उत्तर दायित्व का निर्वहन करते हुए इन्होंने कार्यपालिका व न्यायपालिका से जुड़ी जिम्मेदारियों को दक्षता पूर्ण निभाने के साथ-साथ सेना के सर्वोच्च कमांडर तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं आईआईटी आईआईएम सहित राष्ट्रीय महत्व के लगभग 150 उच्च शिक्षण संस्थानों के विजिटर के रूप में देश सेवा के नए आयाम स्थापित किए हैं। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के बाद लगभग 1700 फुट की बर्फीली ऊंचाइयों पर स्थित सियाचिन की सबसे ऊंची चोटी कुमार पोस्ट पर जाकर जवानों का हौसला बढ़ाने व तिरंगा फहराने वाले यह दूसरे राष्ट्रपति हैं। शिक्षा व्यवस्था को समुन्नत करने के लिए इन्होंने निरंतर दिशा निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रपति के रूप में इनके कार्यकाल के दौरान ही अनेक लंबित व जटिल मुद्दों के ऐतिहासिक समाधान संभव हुए हैं जिनमें राम जन्मभूमि, अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान को रद्द करना, नागरिकता संशोधन कानून को पारित किया जाना, तीन तलाक की प्रथा को गैरकानूनी घोषित करना आदि शामिल है। जन कल्याण हेतु इनके राष्ट्रपतित्व में कृषि सुधार विधेयक, फॉरेंसिक विश्वविद्यालय अधिनियम, रक्षा विश्वविद्यालय अधिनियम, आपदा कार्मिक संरक्षण अधिनियम तथा नई शिक्षा नीति जैसे नीतिगत मसलों को अनुमोदन प्राप्त हुआ। इनके मार्गदर्शन में निष्पादित इन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए हम सब ही नहीं आगामी पीढ़ियां भी सदैव उपकृत महसूस करेंगी।
आधुनिक विकास और प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन, नैतिकता व मूल्य बोध पर आधारित कार्य निष्पादन, समावेशी आर्थिक प्रगति की पक्षधरता, सर्वे भवंतू सुखिन: का भाव तथा समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता एवं सक्रियता इनकी सोच और कार्यशैली में सदैव परिलक्षित होते हैं।
आज इनकी गरिमामई उपस्थिति से हम अतिशय उल्लसित, आनंदित और अभिभूत हैं। इनके स्नेहिल सानिध्य और मार्गदर्शन के लिए हम अंतरतम की गहराई से पुनःउनका अभिनंदन करते हैं, तथा यह मंगल कामना करते हैं कि ईश्वर इनको स्वस्थ दीर्घायु जीवन प्रदान करें।

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