कानपुर सेंट्रल: सरकार को सालाना 80 करोड़ की चोट दे रहा केवल ये एक सुपाड़ी तस्कर!

> कानपुर सेंट्रल पर हर दूसरे दिन उतरती है मुनक्का की 40 से 50 लाख कीमत की सुपाड़ी
> 50 से 60 हजार रूपये तक होती है 80 किलो सुपाड़ी से भरी बोरी की कीमत
> हर महीने 6 से 7 करोड़ की टैक्स चोरी करवाके, खुद कमाता है 15 से 20 लाख
> टैक्स चोरी की रकम बंटती है जीएसटी और कस्टम से लेकर रेलवे अधिकारियों तक के बीच

कानपुर। सेंट्रल का अपराधी सुपाड़ी तस्कर मो. आफताब अंसारी उर्फ मुनक्का लाली, टुकड़ी, चूरा, मुक्खा, सीएफ, टीएफ, आपी और साबुत दाना वगैरह 400 से 800 रुपये प्रति किलो वाली सुपाड़ी किस्मों की तस्करी करता है, जो कानपुर और आसपास गुटखा-पान मसाला उद्योगों को सप्लाई की जाती है। सुपाड़ी पर अधिकतम टैक्स 108 परसेंट है। तस्करी में ये पूरा टैक्स बचाने के बाद मुनाफा दुगने से भी ज्यादा हो जाता है। मुनक्का की सुपाड़ी पड़ोसी देश म्यांमार (पूर्व में बर्मा) से की होती है। आसाम से लोड होकर ब्रह्मपुत्र एक्सप्रेस, कोविड स्पेशल जैसी ट्रेनों लीज बोगी व पार्सल से बुक होकर कानपुर आती है। सुपाड़ी के अधिकतर बोरे 80 किलोग्राम तक के होते हैं। इन बोरों में सुपाड़ी की औसत कीमत 650 रुपये प्रति किलो मान लें, तो मुनक्का की एक बोरी सुपाड़ी 52 हजार रुपए की हुई। मुनक्का एक बार में 80 से 125 बोरी सुपाड़ी मंगवाता है। अब एक बोरी की औसत कीमत 50 हजार, तो 80 बोरियों की औसत कीमत 42 लाख रुपये हुई। यानी की कानपुर सेंट्रल का तस्कर मुनक्का एक बार में ही कम से कम 40 से 45 लाख रुपए की टैक्स चोरी की सुपाड़ी शहर में मंगवाता है। 40 लाख की सुपाड़ी पर 108 फीसदी के हिसाब से टैक्स हुआ लगभग 45 लाख रुपये। और मुनक्का महीने में कम से कम 15 दिन सुपाड़ी मंगवाता है। इस हिसाब से 15 दिनों में वो 6 करोड़ 75 लाख रुपये की, और पूरे साल में 80 करोड़ रुपये टैक्स की चोट दे रहा है। मुनक्का को इस टैक्स चोरी वाली बचत का 80 फीसदी तक हिस्सा घूस के रूप में जीएसटी, कस्टम, रेल प्रशासन और लोकल पुलिस को बाँटना पड़ता है। अब जान लीजिए कि तस्करी की हर एक सुपाड़ी की बोरी पर बिक्री के बाद तस्कर को कम से कम 1000 (एक हजार) रुपये से लेकर 2500 रूपये तक की बचत होती है, जो बाजार में डिमांड पर निर्भर करती है। यानि कि 80 बोरी बेचने पर मुनक्का को न्यूनतम 80 हजार रूपये की बचत हुई। चूंकि मुनक्का की सुपाड़ी महीने में 15 दिन कानपुर सेंट्रल पर उतरती है, तो एक बार में 80 हजार के हिसाब से 15 दिन में ही उसको कम से कम 14 से 15 लाख रूपये का मुनाफा हुआ। हर महीने 15 लाख के हिसाब से मुनक्का एक साल में टैक्स चोरी करके कम से कम लगभग 2 करोड़ का मुनाफा कमा रहा है। सुपाड़ी के अलावा मुनक्का पोश्ता दाना, होजरी जैसे आइटमों पर भी टैक्स चोरी से उसकी काली कमाई दो़ गुनी हो जाती है।

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