कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण रविवार को यूपी बीजेपी चीफ स्वतंत्रदेव सिंह से मुलाकात करने के लिए उनके आवास पर पहुंचे

लखनऊ। कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण रविवार को यूपी बीजेपी चीफ स्वतंत्रदेव सिंह से मुलाकात करने के लिए उनके आवास पर पहुंचे। दोनों के अंद बंद कमरे में 2022 को लेकर मंथन हुआ। बताया जा रहा है कि कन्नौज सदर सीट से पार्टी उन्हें चुनाव के मैदान में उतार कर सपा प्रमुख के बचे आखिरी किले पर कमल का फूल खिलाने के लिए रणनीति बनाई गई है।
कानपुर के निवर्तमान पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बीजेपी यूपी चीफ अध्यक्ष स्वतन्त्र देव सिंह से मिलने के बाद कहा कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष का आशीर्वाद लिया है। पार्टी जो काम सौंपेगी, उसे पूरी इमानदारी के साथ पूरा करूंगा। पुलिस की नौकरी में रहते हुए समाज की सेवा की। अब राजनीति के जरिए समाज के लिए आगे भी काम करता रहूंगा। हालांकि बीजेपी चीफ के साथ क्या बात हुई है, उसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया।असीम अरुण ने एक दिन पहले ही ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कहने पर बीजेपी में शामिल हो रहे हैं। असीम अरुण की गिनती एक तेज-तर्रार पुलिस अफसरों की जाती है। समाजवादी पार्टी की सरकार में इन्हें एटीएस की जिम्मेदारी दी गई थी। एटीएस में रहते हुए असीम अरुण ने आतंकवादी सैफुउल्ला को मार गिराने में अहम रोल निभाया था। असीम अरुण ने स्वाट टीम का गठन किया। डायल 112 में रहते हुए इसे आमलोगों तक पहुंचाया था।असीम अरुण के बताया जा रहा है कि इन्हें बीजेपी कन्नौज सदर सीट से चुनाव के मैदान में उतार सकती है। यह सीट सपा का मजबूत गढ़ रही है। कन्नौज सदर सीट पर पिछले 20 वर्षों से सपा का एक छत्र राज है। तीन बार से अनिल दोहरे साइकिल के निशान पर चुनाव जीतते आ रहे हैं। 2017 में मोदी मैजिक के दौरान बीजेपी ने इस सीट को लेकर जबरदस्त घेराबंदी की थी, लेकिन सपा का किला ढहा नहीं पाई थी।
2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर के बावजूद बीजेपी कन्नौज सीट हार गई थी। पिछले पौने पांच साल के दौरान बीजेपी इस सीट पर सुयोग्य प्रत्याशी तलाश रही थी। चर्चा है कि बीजेपी असीम अरुण को कन्नौज सदर से चुनाव लड़ाएगी। इस सीट पर वर्तमान विधायक जाटव समाज से है। असीम अरुण भी उसी बिरादरी से आते हैं। पार्टी उनकी व डीजीपी रहे पिता श्रीराम अरुण की छवि और मोदी, योगी के आभा मंडल के सहारे 2022 में कमल खिलाना चाहती है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने करीब डेढ़ महीने पहले राजनीति में आने और चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। यह बात उन्होंने बीजेपी और प्रदेश सरकार की सबसे मजबूत कड़ी के सामने रखी थी। उनके वीआरएस देने और बीजेपी में शामिल होने के एलान के पीछे संघ की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। असीम अरुण गोरखपुर में डीआईजी के रूप में अपनी पोस्टिंग के दौरान गोरक्षपीठ के संपर्क में आए थे। तब से उनका पीठ से लगाव बढ़ता गया। इसका परिणाम सबके सामने है।

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