कानपुर। छात्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में हाल ही में प्रोफेसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े गड़बड़झाला का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले की शिकायत राज्यपाल से की गई है। आरोप है कि व्यवसाय प्रबंधन, विधि, अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाएं, जीवन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रो
फेसर पद के लिए इंटरव्यू लिए गए, लेकिन अयोग्य उम्मीदवारों का चयन कर पहले गुपचुप तरीके से परिणाम जारी कर दिया गया, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद आनन-फानन में विवि की वेबसाइट पर लिस्ट अपलोड की गई। हालांकि विवि प्रबंधन और वीसी ने चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष बताया है।
सीएसजेएमयू प्रशासन ने 28 जुलाई 2021 को व्यवसाय प्रबंधन, विधि, अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाएं, जीवन विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद लिखित परीक्षा कराई गईं, जिसमें चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। ऐसा ही एक मामला ‘अंग्रेजी और आधुनिक यूरोपीय और अन्य विदेशी भाषाएं’ में सामने आया है, जिसमें इंटरव्यू के लिए चयनित 10 अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट में टॉप पर रहने वाली अभ्यर्थी प्रियंका सिंह ने नियुक्ति प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया है। प्रियंका सिंह वर्तमान में सीएसजेएमयू के इसी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर संविदाकर्मी के रूप में तैनात हैं। बताया जा रहा है कि 12 जनवरी को चयन प्रक्रिया की लिस्ट जारी की जानी थी, लेकिन आचार संहिता के कारण 8 जनवरी को ही कमेटी के सामने लिफाफा खोलकर लिस्ट जारी कर दी गई।
शिकायतकर्ता प्रियंका सिंह के राज्यपाल को दिए गए शिकायती पत्र के मुताबिक, उन्हें कुल 109.5 मार्क्स दिए गए, जिसमें एपीआई स्कोर 87, लिखित परीक्षा में 22.5 नंबर मिलने के साथ वो मेरिट लिस्ट के टॉप-1 पर रहीं, जबकि एक और चयनित उम्मीदवार अंकित त्रिवेदी को 73 नंबर और लिखित परीक्षा में 21 नंबर मिले थे। जिसके बाद अंकित कुल 94 नंबर पाकर लिस्ट में 10वें नंबर पर थे, लेकिन 15.5 नंबर के बड़े अंतर के बावजूद अंकित त्रिवेदी को सिलेक्ट कर लिया गया, जबकि इंटरव्यू के नंबरों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए लिखा कि 30 नंबर के इंटरव्यू में अधिकतम 90 फीसदी और न्यूनतम 40 फीसदी नंबर ही दिए जा सकते हैं। इस आधार पर भी अंकित के नंबर उनसे कम ही हैं। इसके बावजूद भी गड़बड़ी कर अंकित त्रिवेदी का चयन कर दिया गया।
वहीं प्रियंका सिंह ने सीएसजेएमयू प्रबंधन पर 7 नंबर कम दिए जाने का भी आरोप लगाया है। प्रियंका का दावा है कि बीएचयू में गोल्ड मेडल के तीन नंबर और टीचिंग एक्सपीरियंस के चार नंबर कम दिए गए। ऐसे में उनका एपीआई स्कोर 94 होना चाहिए, जबकि उन्हें महज 87 एपीआई स्कोर ही दिया, जो कि बिल्कुल भेदभावपूर्ण है।
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि 10 लोगों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, जो इंटरव्यू में सफल हुआ उसका चयन किया गया है। हालांकि नंबरिंग सिस्टम शॉर्ट लिस्टिंग के लिए ही था। इस पूरे इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिग की गई है। इस चयन प्रक्रिया के लिए बाहर से एक्सपर्ट की टीम आई थी।
विश्वविद्यालय प्रबंधन और कुलपति विनय पाठक के मुताबिक,उन्होंने पहले इन नियुक्तियों के लिए जो विज्ञापन दिया था, उसे संशोधित कर दोबारा 28 जुलाई को प्रकाशित किया गया, जिसमें नियुक्ति का आधार सिर्फ इंटरव्यू को ही बताया गया है। लेकिन डेली जनमत न्यूज की टीम ने जब राज्यपाल के ऑर्डर की पड़ताल की तो पाया कि वहां साफ तौर पर लिखा है कि चयन प्रक्रिया 2 भाग में होगी। पहला भाग-शॉर्ट लिस्ट तो दूसरा भाग इंटरव्यू। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रबंधन के दावे खुद ही सवालों के घेरे में है।
बता दें कि साल 2018 में कुलपति विनय कुमार पाठक पर चोरी का शोधपत्र लगाकर नौकरी हासिल का आरोप लग चुका है। सपा और कांग्रेस ने साहित्यक चोरी के आरोपी कुलपति को तुरंत बर्खास्त करने की मांग भी उठाई थी। इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गयी थी। जिसके बाद भी उन्हें कुलपति बनाया। साथ ही कुलपति को एक बड़े राजनीतिज्ञ का वरदस्थ प्राप्त होने का दावा भी किया जाता रहा है।
2022-01-11
