कानपुर। एक बार फिर प्रदेश की सत्ता में काबिज होने के प्रयास में लगी भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में प्रत्याशी चयन में तनिक भी रिस्क नहीं लेना चाहती है। हरहाल में जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में लगे भाजपा संगठन ने अपने स्तर पर कराये गए विभिन्न सर्वे से आई रिपोर्ट के आधार पर कानपुर नगर की एक-एक सीट पर नजरें गड़ाई हैं। जानकार लोगों की मानी जाए तो भाजपा संगठन ने फिलहाल कानपुर नगर से जुड़ी सीटों में अभी तक केवल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रहे कद्दावर नेता सतीश महाना तथा गोविन्दनगर क्षेत्र के विधायक सुरेंद्र मैथानी को ही अपने पुराने क्षेत्र से चुनाव की तैयारी में जुट जाने के लिए हरी झंडी दी है। अन्य सभी क्षेत्रों के विधायक अथवा दावेदा
रों को इंतजार करने के लिए कहा गया है। किस क्षेत्र से किसे मैदान में उतारा जाए अथवा किसका टिकट बदला जाए इस पर दिल्ली स्तर तक मंथन शुरू हो चुका है। इस मंथन में भाजपा संगठन के साथ ही संघ से जुड़े प्रमुख लोग भी माथापच्ची कर रहे हैं। दावेदारों तथा वर्तमान विधायकों को भी तैयारी करते रहने के साथ ही इंतजार करने को कहा गया है। माना जा रहा है कि 20 जनवरी के बाद भाजपा कानपुर क्षेत्र से जुड़े उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देना शुरू करेगी। इस सूची में ही कानपुर के आसपास के अन्य उन जिलों के नाम भी घोषित किये जायेंगे जिनमें तीसरे चरण में मतदान होना हैं।
भाजपा के लिए वैश्य बाहुल्य सीट के रूप में चर्चित आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज करने की कड़ी चुनौती है। इसका प्रमुख कारण यह बताया गया है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की पूरे सूबे में चली प्रचंड लहर के बाद भी यहां दो बार से विधायक रहे भाजपा उम्मीदवार सलिल विश्नोई चुनाव हार गए थे। वह भी तब जब इस सीट को भाजपा की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक माना जाता था और श्री विश्नोई आरएसएस के सबसे करीबी लोगों में एक माने जाते हैं। संगठन में अपने प्रभाव तथा समर्पण के चलते श्री विश्नोई को बाद में भाजपा ने विधान परिषद सदस्य बनाया लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता आर्यनगर सीट से मिली इस हार की टीस को इस चुनाव में हरहालत में मिटा लेना चाहते हैं। जिसके लिए सर्वाधिक माथापच्ची किए जाने की बात सामने आ रही है। फिलहाल इस विधानसभा क्षेत्र के दावेदारों वैश्य समाज से जुड़े रतन कुमार गुप्ता, अनिल गुप्ता, रमापति झुनझुनवाला आदि के नाम चर्चा में हैं। कारण यह है कि उस सीट को वैश्य बाहुल्य सीट माना जाता है। रतन कुमार गुप्ता की पत्नी माया गुप्ता पिछले निकाय चुनाव में सपा के टिकट पर महापौर का चुनाव लड़ी थीं जिसमें उन्हें पराजय का तो सामना करना पड़ा लेकिन वह एक लाख से ज्यादा वोट हासिल करने में सफल हुई थीं। दूसरी तरफ रमापति झुनझुनवाला कई बार इसी विधानसभा क्षेत्र से एक वार्ड से पार्षद रहे और व्यापारी वर्ग में भी इनकी पैठ मानी जाती है। एक अन्य वैश्य नाम अनिल कुमार गुप्ता चार्ली का लिया जा रहा है जो फतेहपुर के व्यापारियों में सक्रिय रहते हैं जहां संघ कार्यालय के पास ही कारवालो नगर में आवास होने के कारण रतन गुप्ता को संघ से जुड़े कुछ लोगों का साथ मिलने की बात कही जा रही है वहीं रमापति झुनझुनवाला को भाजपा के कद्दावर नेता व कई बार इस क्षेत्र के विधायक रहे कैबिनेट मंत्री सतीश महाना का अति करीबी माना जाता है।
वैसे इस सीट से जीत दर्ज करने के लिए भाजपा संगठन से जुड़ा एक वर्ग इस बात पर भी विचार करने पर मन बना रहा है कि इस बार आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र से किसी प्रभावशाली ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारा जाए तो आसानी से जीत दर्ज की जा सकती है। पिछले दिनों भाजपा की राजनीति से जुड़े वीरेन्द्र दुबे ने आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में बैठकें व कम्बल वितरण जैसे कार्यक्रम भी शुरू कर दिए हैं। बसपा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे कानपुर के ही एक प्रभावशाली नेता के भी इस विधानसभा क्षेत्र से सक्रियता तेजी से बढ़ाने की बात कही जा रही है। बसपा सरकार में मंत्री रहे यह नेता कानपुर की छात्र राजनीति से भी जुड़े रहे हैं और पिछले कुछ समय से इन्होंने दिल्ली व लखनऊ स्तर पर भाजपा तथा संघ से जुडे़ कुछ लोगों के बीच अपनी पुरानी गलबहियां बढ़ानी शुरू कर दी थीं। पूर्व में यह नेताजी कानपुर में भाजपा की राजनीति में भी काफी सक्रिय रहे थे।
आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र के साथ ही शहर की कैंट विधानसभा क्षेत्र ऐसा था जहां 2017 की लहर में भी भाजपा का उम्मीदवार पराजित हुआ था। इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सुहैल अंसारी ने जीत दर्ज की थी। आर्यनगर सीट के बाद भाजपा अपना ज्यादा ध्यान इस सीट पर भी लगाए है। भाजपा की राजनीति से जुड़े लोगों की मानी जाए तो ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कैंट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के कद्दावर नेता सतीश महाना कई बार चुनाव जीते। इस बात 2012 के चुनाव में भी भाजपा के रघुनंदन सिंह भदौरिया इस सीट पर जीत दर्ज कर भाजपा का कब्जा बनाए रखा लेकिन पिछले चुनाव में वह पराजित हो गए। भाजपा किसी भी स्थिति में आर्यनगर व कैंट की सीटें अपनी झोली में डालना चाहती है। इस सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार के नाम पर गहनता से विचार किया जा रहा है। फिलहाल पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया तथा भाजपा संगठन से काफी समय से जुड़े राकेश तिवारी के नाम पर विचार हो रहा है क्योंकि मुस्लिम बाहुल्य इस सीट से भाजपा के किसी अन्य प्रमुख नेता ने मजबूत दावेदारी ही नहीं की है। इस विधानसभा क्षेत्र में भी सबसे ज्यादा सतीश महाना की बात चलने की बात कही जा रही है।
2022-01-11
