शुक्रवार शाम तक भाजपा कानपुर के सभी विधायक प्रत्यासियो के नाम घोषित कर दिए गए तो प्रत्यासियो और उनके समर्थकों में उत्साह है।बिल्हौर से विधायक रहे भगवती सागर के सपा में चले जाने के बाद केवल इसी सीट पर प्रत्यासी बदलना पड़ा बाकी सभी 9 सीटों पर पूर्व में प्रत्यासी रह चुके नेताओ पर ही प्रदेश आला कमान ने दांव खेला है ।आर्यनगर और सीसामऊ में बस थोड़ा द इधर उधर किया गया है।
बात करें छावनी विधानसभा की तो यहाँ से पूर्व विधायक और 2017 में रनर रहे रघुनंदन भदौरिया पर ही पार्टी ने दांव खेला है।शुक्रवार को जैसे ही राहुनन्दन का टिकट फाइनल हुआ उनके समर्थकों ने देर रात तक इसका जश्न मनाया।लेकिन क्या 2012 में जीत दर्ज करने वाले रघुनंदन भदौरिया इस सीट से 2022 में भी चुनावी वैतरणी पार कर पाएंगे।ये सवाल इसलिए कि एक तो इस सीट में लगभग 40 प्रतिशत वोटर्स मुस्लिम है और निर्णायक भी है जो कम से कम हिंदुत्व की बात करने वाली भाजपा वे खेमे में जाकर वोट नही करने वाले।2017 में मोदी लहर के बावजूद रघुनंदन इस सीट से लगभग 9 हजार वोटों से कांग्रेस और सपा गठबंधन के प्रत्यासी सोहिल अख्तर अंसारी से चुनाव हार गए थे।उस समय छावनी भाजपा नेताओं की गुटबाजी और खेमेबाजी की बात भी सामने आई थी और अनुमान लगाया जा रहा था कि सम्भवतः इसी गुटबाजी के चलते भाजपा ने सीट गंवाई थी।2017 में भाजपा में इस सीट से इतने दावेदार भी नही थे लेकिन इस बार कई नेता अपनी अपनी दावेदारी ठोंक रहे थे।और दावेदारी करने वालो में सब अलग अलग बड़े नेताओं के गुट से आते है इसलिए चुनाव में गुटबाजी और भीतर घात की सम्भावनाओ से इंकार नही किया जा सकता ।ऐसे में देखने वाली बात होगी की क्या रघुनंदन भदौरिया इन चैलेंज से निपट कर 2012 का इतिहास दोहरा पाएंगे या फिर बीजेपी को ये सीट दोबारा अपने कब्जे में करने के लिए एक और चुनाव का इंतजार करना होगा।
2022-01-22
