उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद सहित प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल

कानपुर। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद सहित प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल है । क्योंकि मुख्यमंत्री ने एसपी गोयल पर अटूट विश्वास कर रखा था जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है और भाजपा में भगदड़ का मुख्य कारण इसी तरह के कन अधिकारी रहे हैं। जिन्होंने मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भाजपा व मंत्री की सिफारिशों को तरजीह देकर उनके पत्रों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। इसका ताजा उदाहरण कानपुर मेडिकल कॉलेज से संबंधित संक्रामक रोग चिकित्सालय की सहायक नर्सिंग अधीक्षक पुष्पा यादव है जिनका प्रशासनिक आधार पर गलत तथ्य लिखकर तत्कालीन हैलट की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ज्योति सक्सेना ने तबाडला करा दिया। बिना प्रधानाचार्य के अनुमति के मनमाने तरीके से आरोप लगाकर शासन को तबादले के लिए लिखा था। पुष्पा यादव का गुनाह सिर्फ इतना था कि उनके पति पेशे से पत्रकार हैं और उन्होंने डॉक्टर ज्योति सक्सेना के भ्रष्टाचार को उजागर किया था। डॉक्टर ज्योति सक्सेना ने एक ही दिन में तीन आदेश पारित किए 23 जून 2021 को डॉ ज्योति सक्सेना का तबादला कर्तव्य हीनता कार्यो में शिथिलता के कारण प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण आलोक कुमार ने उनको उनके मूल विभाग परिवार कल्याण में भेज दिया था । 23 जून 21 को तबादला होने के बाद 23 जून को ही डॉ ज्योति सक्सेना ने पद का दुरुपयोग करते हुए तबादला होने के बावजूद सहायक नर्सिंग अधीक्षक पुष्पा यादव का आदेश लिखा और उसी दिन संक्रामक रोग चिकित्सालय के चपरासी के पद पर तैनात काशी प्रसाद तिवारी को दफ्तरी के पद पर पदोन्नत दे दी । इसमें पर्दे के पीछे से लाखों रुपए का गोलमाल किया इसमें संक्रामक रोग चिकित्सालय का तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर ए के शुक्ला भी शामिल थे। जिन पर पूर्व में प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोप लगे और इस को प्रमुखता से एक राष्ट्रीय दैनिक ने छापा था परंतु भ्रष्टाचार के सामने यह मामला बना साबित हो गया था। इसी तरह का भ्रष्टाचार डॉक्टर ज्योति सक्सेना द्वारा किया गया बिना कोई कमेटी गठित किए बिना अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर चपरासी को दफ्तरी के पद पर तबादले वाले दिन ही पदोन्नत करके यह साबित कर दिया कि उनके सामने सभी अधिकारियों के आदेश बेमानी हैं। डॉक्टर ज्योति सक्सेना के इस भ्रष्टाचार की शिकायत पूर्व में 25 मार्च 2021 को उनके पति ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य की थी । जिसमें आशंका जताई थी कि वह मेरी पत्नी पुष्पा यादव व पुत्रवधू का उत्पीड़न कर सकती हैं वह तबादला कर सकती हैं। यह पत्र अब तक शासन में दबा रहा और उसका यादव का तबादला होने के बाद पत्र को दबे हुए 8 माह हो गए तब इसकी जांच शुरू की गई है । डॉक्टर ज्योति सक्सेना के इस भ्रष्टाचार की शिकायत भाजपा सरकार के विधायकों के दरबार में भी पहुंची। भाजपा विधायक महेंद्र प्रताप सिंह व छिबरामऊ के विधायक कैलाश राजपूत ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य को कड़ा पत्र लिखते हुए कहा की पुष्पा यादव के ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं वह बिना साक्ष्य प्रमाण पत्र के लगाए गए हैं। जिससे दोष भावना की बू आती है। क्योंकि डॉक्टर ज्योति सक्सेना के रिश्तेदार हृदय रोग के डायरेक्टर डॉ विनय कृष्णा है । उन्हीं के इशारे पर यह कार्रवाई की गई है। विनय कृष्णा की एक आंख खराब है पुष्पा यादव के पति ने पत्रकार होने के नाते इसका उजागर शासन में किया है । जिसकी जांच चल रही है पुष्पा यादव का तबादला और औरैया जनपद किया गया है उसे तत्काल निरस्त किया जाए। महानिदेशक ने इस पर अपना प्रस्ताव बनाकर दोनों विधायकों के पत्र लगाकर अपर प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद के पास भेजा । वहां लगभग 1 माह तक इस पत्रों को दबाए रखा गया और बाद में अपर प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने भाजपा के दोनों विधायकों के पत्र रद्दी की टोकरी में डालते हुए पुष्पा यादव का तबादले पर विचार करने से मना कर दिया। इससे यह साफ साबित हो गया कि यादव जात का उत्पीड़न किया साथ ही भाजपा विधायकों की हैसियत क्या थी इसका भी खुलासा हो गया । क्योंकि एसपी गोयल का वरदहस्त है जिसके चलते यह हमेशा इसी तरह के कृत्य करते हुए किसी भी मंत्री व विधायकों के पत्तों को तवज्जो नहीं देते हैं। इनके सामने मुख्यमंत्री का आदेश भी बौना साबित होता है । मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि किसी भी भाजपा विधायक का पत्र अगर आता है तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए और संबंधित विधायक को उससे अवगत कराया जाए। अमित मोहन प्रसाद के सामने मुख्यमंत्री के आदेश बौना साबित हो गया है।

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