कानपुर। दलबदल के दबाब के बीच बैकफुट पर आई भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जीतने के लिए कई भाजपा विधायकों के टिकट काटने व सीट बदलने की योजना से भले ही अपने पांव पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा हो लेकिन अब इसके डैमेज कंट्रोल के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने जिम्मेदारी उठा ली है। भाजपा की पूर्ण बहुमत से एक बार फिर सरकार बनाने की रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए संघ ने भाजपा की नैया पार करने का जिम्मा लिया है। इसके लिए व्यापक रणनीति तैयार की गई है। यह तय किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोग अपने स्तर पर हर विधानसभा क्षेत्र में एक अलग समिति बनाकर भाजपा प्रत्याशी को जिताने पर काम करेंगे। इस समिति में भाजपा के प्रत्याशी के अलावा संघ के कुछ जिम्मेदार ही शामिल होंगे। चुनाव जिताने के लिए पर्दे के पीछे से काम करने वाली इस समिति में कौन है कौन नहीं इसकी जानकारी भाजपा द्वारा बनाई गई विधानसभावार चुनाव संचालन समिति के लोगों को नहीं होगी। बैठकों के क्रम में रविवार को इसकी शुरूआत भी कर दी गई। पहली बैठक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुडे़ सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के प्रत्याशी विधान परिषद सदस्य सलिल विश्नोई के पक्ष में रविवार को पीरोड स्थित संघ द्वारा संचालित विद्यालय में की गई।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े जिम्मेदार लोगों की मानी जाए तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अचानक फिर से तेजी पकड़वाने का फैसला आननफानन में इसलिए लेना पड़ा क्योंकि भाजपा द्वारा कुछ समय पूर्व तक बनाई गई रणनीति पर अमल नहीं हो सका। भाजपा द्वारा विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कराने को लेकर कराए गए सर्वे में यह सामने आया था कि कई विधायकों के टिकट काटकर यदि नये उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया जाय तो भाजपा 2017 में मिली सफलता को आसानी से दोहरा सकती है। इसकी पूरी तैयारी भी कर ली गई थी। यह भी तय हो गया था कि किस किस विधायक के टिकट काटने हैं और किस प्रभावशाली विधायक का चुनाव क्षेत्र बदला जाने से वह एक बार फिर चुनाव जीत सकता है। इसमें कानपुर के भी तीन विधायकों के नाम शामिल थे। जानकारों का कहना है कि भाजपा द्वारा पूर्व में बनाई गई रणनीति के तहत कल्याणपुर की विधायक नीलिमा कटियार को भोगनीपुर से चुनाव लड़ाया जाना था और किदवई नगर क्षेत्र के विधायक महेश त्रिवेदी को कानपुर देहात की रनियां सीट पर चुनाव लड़ने के लिए भेजा जाना था। बिठूर के विधायक अभिजीत सिंह सांगा को टिकट न देकर संगठन से जोड़ने की बात कही जा रही थी। लेकिन प्रत्याशी घोषित होने के कुछ समय पहले प्रदेश के कबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की अगुवाई में कई विधायकों के भाजपा छोड़ने से भाजपा बैकफुट पर आ गई। भाजपा नेतृत्व में यह संदेश गया कि अगर और विधायक भाजपा छोड़ देते हैं तो हवा का रुख देखकर मतदान करने वाला दो से तीन फीसदी मतदाता भाजपा से किनारा कर सकता है। ऐसे में भाजपा को अपनी योजना से पीछे हटकर सभी वर्तमान विधायकों का टिकट एक बार फिर यथावत रखना पड़ा। केवल सीसामऊ व आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी बदले गए।
भाजपा की राजनीति से जुड़े भरोसेमंद लोगों की मानी जाए तो इस फ्लाप हुई रणनीति के डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा नेता संघ की शरण में गए और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने दबाब में बैकफुट पर आने के भाजपा के फैसले के डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी उठाने पर सहमति जता दी। नई रणनीति के तहत यह तय किया गया है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को प्रत्याशी बदलने अथवा मजबूरी में पुराने विधायक को ही टिकट देने का फैसला करने पड़ा वहां राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अपनी पूरी ताकत के साथ भाजपा की नैया को पार लगाकर भाजपा प्रत्याशी को जिताने का काम करेंगे। इसके लिए विधानसभा क्षेत्र पर एक चुनाव संचालन समिति बनाई जाएगी जिसमें उस विधानसभा क्षेत्र की सभी शाखाओं के प्रमुख भी शामिल होंगे। जहां शाखा नहीं चल रही है वहां संघ से जुड़े क्षेत्र के ख्याति प्राप्त लोगों को शामिल किया जाएगा जो आम लोगों के बीच बैठक अथवा चर्चा कर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनायेंगे।
भाजपा व संघ से जुड़े जिम्मेदार लोगों की मानी जाए तो भाजपा की नैया पार कराने की जिम्मेदारी लेने के बाद संघ के प्रमुख लोगों की पहली बैठक रविवार को पीरोड स्थित ओंमकारेश्वर विद्यालय में हुई। कहा जाता है कि यह विद्यालय संघ के ही प्रमुख लोगों द्वारा संचालित किया जाता है। पहली बैठक यहां इसलिए भी की गई क्योंकि यहां के प्रत्याशी सलिल विश्नोई लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े हैं और अचानक टिकट बदलने के बाद उनके लिए यह क्षेत्र नया है। श्री विश्नोई को यह भी पता चला है कि भाजपा के ही कुछ लोग भितरघात कर उनकी राह में रोड़े अटका सकते हैं इसलिए संघ ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से ही अपने अभियान की शुरूआत की है। बैठक में यह तय किया गया कि संघ से जुड़े लोग रविवार की शाम से ही अपनी रणनीति पर अमल करना शुरू कर देंगे। इस अभियान में संघ से जुड़े ब्राह्म्ण समाज के लोगों को आगे रखा जाएगा।
2022-01-23
