कोरोना काल मे जिस तरह से व्यापारियों का व्यापार चौपट लोगो से रोजगार छिना ,उसके बाद से या तो वे अपने गांव की ओर रुख कर गए और अपनी खेती की ओर उतर आए या फिर कोई छोटा व्यापार शुरू कर दिया ऐसा ही कुछ किसानों की मुश्किलों को हल कर उन्हें मुनाफा कमाने का बीड़ा घाटमपुर के दयाशंकर ने उठाया है जिन्होंने अपने खेतों में स्ट्राबेरी की खेती शुरू की है। आपको बता दें कि ठंडे प्रदेश हिमाचल,उत्तराखंड जैसे प्रदेशो में स्ट्राबेरी की खेती के बारे में आप सभी ने सुना होगा ,जहां किसान स्ट्राबेरी की खेती कर अधिक मुनाफा कमा रहे है। धीरे धीरे इस व्यापार में किसानों का रुझान काफी बढ़ने लगा है और अब यह भारत के कई राज्यो में भी इसकी खेती देखने को मिल जाती है वही अब इसकी खेती उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल रही है इसी तरह से कुछ कर गुजरने का जज़्बा कानपुर के घाटमपुर रहने वाले किसान दयाशंकर में देखने को मिला है,जहां दयाशंकर ने गूगल में सर्च करते करते और इस खेती का गम्भीर अध्ययन करके स्ट्राबेरी की खेती शुरू की और किसानो को इस खेती की ओर जागरूक भी कर रहे है।
दयाशंकर का कहना है कि पिछले साल कोरोना में जिस तरह से व्यापार और रोजगार प्रभावित हुआ उसके बाद समाचार पत्रों के जरिये पढा तो स्ट्राबेरी की खूबियों के बारे में पता चला जिसके बाद इसके बारे में गुगल से अध्ययन करना शुरू कर दिया। जहां एक तो यह शरीर के लिए फायदेमंद है और किसानों की इनकम के लिए यह खेती लाभकारी है और लागत के अनुसार काफी अधिक मुनाफा भी है। स्ट्राबेरी को तैयार करने के लिए खेती के लिए गहरी जुताई करनी होती है, प्लांटेशन करवाया जाता है ज्यादा जानकारी नही थी फिर भी अपनी ओर से हर जानकारी के साथ लगे रहे और आज 3 महीने में इसमें फल पकने लगे है और फल का साइज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा है।
इसमें अबतक हज़ार पौधे में 1 लाख की लागत आ चुकी है। और साथ ही इसकी देखरेख बहुत करनी पड़ती है। गंदा पानी नही इस खेती पर पड़ना चाहिए केवल ट्यूबवेल पानी से ही होता है। हमारी सोच थी इस फसल को लगाने के बाद गांव के लोग इसे जाने और आगे बढ़कर वे भी पौधे लगाएं जिससे हमारे किसानों की इनकम बढ़े और वे अच्छा मुनाफ़ा कमा सके अभी क्योंकि नई खेती है तो हमारे सामने बड़ी चुनौती भी है कि आगे इसे कैसे बढ़ाया जाए।
2022-01-25
