तीनों सीटों पर टिकट घोषित करने के लिए दबाब बनाना शुरू कर दिया

कानपुर। अपनी जीत-हार की गणित को लेकर कांग्रेस व सपा के नेताओं द्वारा नाक फंसाये जाने से अभी तक कांग्रेस गोविन्दनगर तथा सीसामऊ व समाजवादी पार्टी कैंट क्षेत्र के अपने उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर सकी है। नामांकन प्रक्रिया तेजी से बढ़ने के बाद पार्टी के नेताओं ने जल्द इन तीनों सीटों पर टिकट घोषित करने के लिए अपने-अपने राजनैतिक संरक्षणदाताओं पर दबाब बनाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस तथा सपा दोनों ही दलों में फंसी हुई क्रमशः गोविन्दनगर, सीसामऊ तथा कैंट क्षेत्र में चुनिंदा दावेदारों के नाम तय कर लिए हैं अब इनके बीच मंथन चल रहा कि किसे मैदान में उतारा जाय जिसका लाभ पार्टी को मिल सके। इधर प्रतिद्वंद्वी प्रमुख उम्मीदवारों के सामने न आने से भाजपा के प्रत्याशी शुरूआती लड़ाई और जनसंपर्क में दूसरे प्रत्याशियों से आगे निकलते जा रहे हैं। गोविन्द नगर सीट से अपना उम्मीदवार बनाने के लिए दो दिन पहले किदवई नगर के कांग्रेस उम्मीदवार अजय कपूर ने दिल्ली जाकर अपनी गोटें फिट कीं। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में कांग्रेस गोविन्दनगर तथा सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से अपने उम्मीदवार का नाम फाइनल कर सकती है।
इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने अपने विधायक सुरेन्द्र मैथानी को मैदान में उतारा है। उपचुनाव जीतने के बाद से ही क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले सुरेन्द्र मैथानी ने टिकट मिलने के बाद से ही जनसंपर्क शुरू कर दिया था और वह शुरूआती लड़ाई में विरोधी उम्मीदवारों से काफी आगे निकल गए। समाजवादी पार्टी ने यहां से दो दिन पहले पिछली बार से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े सम्राट विकास को मैदान में उतारा है। पहले इस सीट से सुनील शुक्ला अथवा बिकरू कांड की आरोपित रही खुशी दुबे की मां को टिकट देने की बात चल रही थी। सपा ने तो प्रत्याशी घोषित कर दिया लेकिन कांग्रेस अभी तक यहां से अपने उम्मीदवार का नाम तय नहीं कर सकी है। भाजपा सांसद सत्यदेव पचौरी के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से खाली हुई इस सीट के उपचुनाव में कांग्रेस की करिश्मा ठाकुर दूसरे नंबर पर रही थीं। वह कांग्रेस में बुंदेलखंड क्षेत्र की अध्यक्ष भी हैं और मजबूती से टिकट के लिए दावा कर रही हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस दक्षिण के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र दीक्षित भी गोविन्द नगर विधानसभा क्षेत्र से टिकट के लिए ताल ठोंके हैं और उन्हें पूर्व विधायक तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव अजय कपूर का खुला समर्थन मिला है। इस बार किदवई नगर क्षेत्र से एक बार फिर मैदान में उतरे अजय कपूर शैलेंद्र दीक्षित को इसलिए भी टिकट चाहते हैं क्योंकि उनकी पकड़ किदवई नगर विधानसभा क्षेत्र में आने वाले ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र में काफी मजबूत बताई जाती है।
इस विधानसभा क्षेत्र से कुछ समय पूर्व ही सपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हाजी सुहैल अंसारी अपने संपर्क सूत्रों के माध्यम से टिकट हासिल करने के प्रयास में लगे हैं। इस क्षेत्र से कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल नसीमुद्दीन के करीबी हाजी वसीक ने भी दावा कर रखा है। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री को भी सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। कांग्रेस में सक्रिय जानकार लोगों की मानी जाए तो पूर्व विधायक अजय कपूर इस सीट से सुहैल अहमद को टिकट मिलने के पक्ष में नहीं हैं। इसका एक कारण सपा विधायक इरफान सोलंकी के पिता हाजी मुश्ताक सोलंकी से उनकी नजदीकियां रहीं और यह माना जा रहा है कि अगर हाजी सुहैल चुनाव मैदान में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरते हैं तो यह इरफान सोलंकी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। क्योंकि पूर्व में लगभग हर चुनाव में सुहैल अहमद इरफान के साथ रहे और इस बार क्षेत्र के कुछ पार्षद भी हाजी सुहैल के साथ सपा छोड़कर कांग्रेस में जा चुके हैं। जिस तरह अजय कपूर अपने पड़ोस की विधानसभा क्षेत्र गोविन्दनगर से अपने क्षेत्र की गणित को देखते हुए ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारने के प्रयास में लगे हैं वैसे हीं आर्यनगर से मैदान में उतरे कांग्रेस के प्रमोद जायसवाल इस प्रयास में लगे हैं कि अगर सीसामऊ से हाजी सुहैल का टिकट हो जाता है तो मुस्लिम वोट को अपने पक्ष में करने के लिए काफी आसानी होगी। फिलहाल अब हाजी सुहैल व हरप्रकाश अग्निहोत्री के नामों पर ही टिकट का मंथन केंद्रित होकर रह गया है।
समाजवादी पार्टी ने कानपुर की लगभग हर सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए लेकिन कैंट विधानसभा क्षेत्र से अभी वह प्रत्याशी का नाम तय नहीं कर पा रही है। पिछली बार जब सपा कांग्रेस के गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी तो कांग्रेस के उम्मीदवार सुहैल अंसारी यहां से विधायक बने थे। इस बार समाजवादी पार्टी में इस विधानसभा सीट से टिकट का दावा करने वालों की संख्या काफी ज्यादा रही। जानकारों का कहना है कि तीन दिन पहले यहां से प्रत्याशी का नाम तय करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रमुख दावेदारों को अपने यहां बुलाया भी और डा. इमरान को ट्रस्ट में जाकर फार्म बी हासिल करने की बात कह दी लेकिन पिछले तीन चुनाव से इस विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे मोहम्मद हसन रूमी ने अपनी नाक फंसा दी और जमीनी कार्यकर्ता होने की बात कहकर राष्ट्रीय अध्यक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाब भी बना लिया जिसके चलते डा. इमरान को रोक दिया गया और अब एक बार फिर से मोहम्मद हसन रूमी, डा. इमरान अथवा इन दोनों को संतुष्ट कर तीसरे नये उम्मीदवार के रूप में इरशाद मलिक के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। अब तीनों ही दावेदार अपने-अपने संपर्क सूत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व पर दबाब बनाने में लगे हैं कि टिकट का फैसला उनके पक्ष में हो जाए l

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