कानपुर। गैंगेस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद बिकरु में उसके खौफ का साम्राज्य भी नेस्तनाबूत हो चुका है। जिनकी जमीनों पर विकास ने जबरिया कब्जा कर रखा था, वो जमीन असली मालिकों को मिल चुकी हैं। इसमें ज्यादातर तो वो हैं, जो ये उम्मीद भी छोड़ चुके थे कि उनकी प्रॉपर्टी उन्हें वापस मिल जाएगी। विकास ने जिन लोगों के परिजनों की हत्या कर दी थी, उसके मारे जाने के बाद अब उनके परिजन भी सुकून में हैं।
2000 शिवली में ताराचन्द्र इंटर कॉलेज के प्राचार्य सिद्धेश्वर पांडे की हत्या कर दी गई थी और उनकी क़ीमती जमीन पर विकास दुबे ने कब्जा कर लिया था। जिसकी कीमत करीब 5 करोड़ से ज्यादा है। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सिद्धेश्वर पांडे के परिवार को जमीन वापस मिल गई है । उनके बेटे राजे पांडे बताते हैं कि उनके पिताजी की हत्या के बाद वह जमीन को भूल ही गए थे। एनकाउंटर में विकास दुबे के मारे जाने के बाद उन्हें उनकी जमीन वापस मिल गई है।
ऐसा ही एक दूसरा मामला शिवली के रहने वाले संतोष मिश्रा का सामने आया। इनकी 6 बीघा जमीन पर पिछले 20 सालों से विकास कब्जा किए हुए था। जबकि खसरा खतौनी में इनका ही नाम दर्ज है। विवाद ना बढ़े इसके लिए यह उस जमीन को भूल गए थे। जब विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद तहसील के अधिकारियों ने सभी से अपील की और कागज़ दिखाने पर जमीन वापस दिलाने का आश्वासन दिया। इस पर संतोष मिश्र ने अपना दावा पेश किया, जमीन की पैमाइश करा कर वापस दी गई। कागजी लिखा पढ़ी पूरी होने के बाद इस साल मार्च में जमीन इनको फिर से वापस मिली।
इसी तरह का एक और मामला मुन्ना यादव का देखने को मिला। मुन्ना यादव ने 15 साल पहले कुछ रुपयों की जरूरत पड़ने पर विकास से 2 लाख रुपए उधार लिया था। समय से पैसा नही चुका पाने पर उसने इनके 3 बीघा खेती अपने नाम करा ली और पूरी 7 बीघा खेती कब्जा कर ली। जिस पर यह किसी तरह का विरोध नही कर पाए। पिछले साल 10 जुलाई को विकास का एनकाउंटर होने के बाद यह तहसील गए और खेती के कागज दिखाए। इनको फिलहाल चार बीघा खेती वापस मिल गई है। तीन बीघा के लिये इन्होंने कोर्ट में मुक़दमा दायर कर दिया है। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद गठित SIT को इन्होंने बयान भी दर्ज कराए हैं।
विकास दुबे की मौत से कई घरों में दहशत का अंत जो चुका है। जिन परिवारों में विकास दुबे ने हत्याएं की थी, वह परिवार विकास दुबे की मौत के एक साल बाद अब सुकून से सांस ले रहे हैं। 1999 में शिवली के तत्कालीन चेयरमैन लल्लन बाजपेई के छोटे भाई बयुअन बाजपेई की विकास दुबे ने शिवली में गोली मार कर हत्या कर दी थी। 2002 में विकास दुबे ने जेल में रह कर लल्लन बाजपेई के घर हमला कराया था, जिसमें कृष्ण बिहारी मिश्र, बुलाकी और कौशल किशोर तिवारी की मौत हुई थी। किसी तरह लल्लन खुद की जान बचा पाए थे। वह बताते हैं कि उस खौफ़नाक मंजर को वह कभी नही भूल सकते हैं।
वर्ष 2000 की बात है, जब ताराचंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सिद्धेश्वर पांडेय विद्यालय की जमीन की नाप करवा रहे थे। जिस पर विकास दुबे अपना दावा कर रहा था। तभी विकास दुबे अपने भाई दीपू दुबे के साथ मौके पर पहुंचा और ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी दिनदहाड़े हत्या कर दी। सिद्धेश्वर पांडे के बेटे राजे बताते हैं, कि उसके बाद वह शिवली छोड़ कर कानपुर रहने लगे थे। विकास दुबे उनकी 12 बीघा जमीन कब्जा किए रहा। लेकिन एक साल से पूरे क्षेत्र में डर और भय पूरी तरह से समाप्त हो चुका है।
साल 2001 की बात है जब दर्ज़ा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ल शिवली किसी काम से गए थे। इसी बीच विकास दुबे ने खुद पर हमला होने की बात करके शिवली थाने का घेराव कर दिया था। जिस पर संतोष शुक्ल थाने पहुँच गए। और थाने के अंदर ही विकास दुबे ने उनकी हत्या कर दी थी।
संतोष शुक्ल के छोटे भाई मनोज शुक्ल बताते हैं कि मुकद्दमे में सुनवाई के दौरान सभी गवाह मुकर गए थे। सिर्फ उन्होंने ही कोर्ट में सामना किया था। गवाहों के मुकरने और सबूतों के अभाव में विकास दुबे बाइज्जत बरी कर दिया गया था। अगर विकास दुबे का अंत उस वक़्त हो गया होता तो अब तक कई हत्याएं रोकी जा सकती थी। शहीद हुए 8 पुलिस के जवान भी बचाए जा सकते थे।
2 और 3 जुलाई की रात बिकरु कांड हुआ था। उस रात के मंजर को गांव वाले अभी तक नही भूल पाए हैं। विकास के पड़ोसी अनूप दुबे बताते है कि सब बर्बाद हो गया। मामूली से विवाद में इतनी मौतें हो गईं। बिकरु के पास जादेपुर जस्सा गांव में रहने वाले राहुल तिवारी ने 2 जुलाई की रात एफआईआर की थी। आरोप लगाया था कि 6 बीघा जमीन के विवाद में विकास दुबे ने उसको जान से मारने की कोशिश की थी। इस एफआईआर पर सीओ देवेन्द्र मिश्र के नेतृत्व में तीन थानों की फोर्स ने रात 1 बजे बिकरु में विकास के घर उसको पकड़ने के लिए दबिश दी थी। जिस पर विकास दुबे और उसके साथियों ने घात लगा कर पुलिस टीम पर हमला बोल कर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में सीओ देवेंद्र मिश्र सहित 8 पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इसके बाद पुलिस की कार्यवाही में 8 दिनों में विकास दुबे सहित 6 बदमाशों को एनकाउंटर में मार गिराया गया था। इस कांड में चार महिलाओं सहित 36 लोगो को अभियुक्त या सहअभियुक्त बनाया गया है। अभी तक तीन अभियुक्तों पर एनएसए के तहत कार्रवाई की जा चुकी है।
