अल्लाह के नबी के सफर मेराज में इस उम्मत के लिये बेशुमार हिदायतें मौजूद हैंः-मौलाना महफूजुर्रहमान क़ासमी
नगर जमीअत उलमा के 102 वर्षीय तीन दिवसीय इज्लास मेराजुन्नबी स0अ0व0 के पहले दिन उलमा ए किराम का खिताब
कानपुर :-
जमीअत उलमा शहर कानपुर के जे़रे एहतमाम तीन दिवसीय इज्लास मेराजुन्नबी का पहला जलसा जमीअत के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी की निगरानी और नगर अध्यक्ष डा. हलीमुल्लाह खां की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। जलसे को खिताब करते हुए जरवल बहराइच से तशरीफ लाये मौलाना महफूजुर्रहमान क़ासमी ने सूरह असरा के द्वारा मेराज के पैग़ाम पर रोशनी डालते हुए कहा कि इबादत सिर्फ अल्लाह की होगी, हमारा सर उसी के आगे झुकेगा, किसी और के आगे हमारा सर झुके यह अल्लाह को गवारा नहीं। माता-पिता के साथ अच्छा सुलूक करना, ग़रीबों, मिस्कीनों(भूखों), रिश्तेदारों, बीवी, शौहर, भाई, बहन के हक़ को अदा करना, लोगों की ग़लतियों को दरगुज़र करने और उनके साथ रहम का मामला करना, मुश्किल हालात में हौसले और हिम्मत से काम लेना, भटके हुए मुसाफिरों की मदद करना, फुजूलखर्ची से बचना, बेकार की रस्मों से परहेज़ करना, हलाल रोज़ी कमाना, ज़िना के क़रीब भी ना जाना, अपने घर की महिलाओं और बच्चियों को पर्दे के लिये कहना इस्लाम की पहचान और हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सफरे मेराज का पैग़ाम है। मौलाना ने कहा कि अगर हम मेराज के पैग़ाम पर सही अर्थां में अमल कर लें तो हमारा समाज अमन, चैन और सुकून वाल समाज बन जायेगा और मजहबे इस्लाम व कुरआन के सम्बन्ध से पैदा की जाने वाली ग़लतफहमियों पर भी लगाम लगेगी।
कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी के महासचिव मौलाना खलील अहमद मज़ाहिरी ने कहा कि अल्लाह की दी हुई नेमतों में सबसे क़ीमती नेमत दौलते ईमान और आखिरी नबी हज़रत मुहम्मद स0अ0व0 के उम्मती होने का शर्फ है, इस नेमत के शुक्र अगर हम अपनी पूरी ज़िंदगी सज्दे में रहें तो भी शुक्र अदा नहीं कर सकते।
तीन दिवसीय जलसे के पहले दिन का शुभारम्भ क़ारी मुजीबुल्लाह इरफज्ञनी की तिलावते कुरआन से हुआ। नगर उपाध्यक्ष मौलाना मुहम्मद अकरम जामई ने संचालन के कर्त्व्यों को पूरा किया। हाफिज़ मुहम्मद मसूद, मुहम्मद शादान ने नात व मनक़बत का नज़राना पेश किया। इस अवसर पर जमीअत उलमा के प्रदेश उपाध्यक्ष मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी और जमीअत उलमा शहर कानपुर के उपाध्यक्ष डा. हलीमुल्लाह खां के अलावा नगर जमीअत के पदाधिकारी व सैंकड़ों की संख्या में अवाम मौजूद थे।
