आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पखवारे की श्रंखला में सखी केंद्र कार्यालय में महिला अधिकार रक्षकों की एक कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें 25 क्षेत्रों की 75 महिला अधिकार रक्षकों ने हिस्सा लिया। जिसमें महिला अधिकार रक्षकों को अपने जीवन में वा महिलाओं की रक्षा हेतु, उन्हें न्याय दिलाने के लिए क्या-क्या दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इस पर खूब वृहत चर्चा हुई।
मुख्यवक्ता के रूप में नीलम चतुर्वेदी, डॉ अर्चना शुक्ला, प्राची त्रिपाठी, अर्चना पांडे, पुष्पा तिवारी, ममता गुप्ता आदि ने उन सवालों पर बेहतर तरह से अपने कार्य के अनुभव के आधार पर रखा।
सखी केंद्र की महामंत्री नीलम चतुर्वेदी जी ने उन को संबोधित करते हुए कहा कि हम आप लोगों को सैल्यूट करते हैं कि आपने अपनी घर की डेहरियों को पार करके अपनी समस्याओं को दूर किया और आज आप कितने लोगों की समस्याओं को दूर कर निशुल्क दूसरों की मदद कर रहे हैं और पूरे समर्पण के भाव से सखी केंद्र से ट्रेनिंग लेकर दूसरों को ट्रेनिंग दे रही है और उन्हें न्याय दिलाने में मदद कर रही है। आज आपने तो सवाल रखे हैं कि पहले आपके पास शिकायत करती हैं। महिलाएं दुखी होती है और बाद में परिवार के द्वारा उन्हें जो भी उत्पीड़न मिल रहा है उसे वह अपना दुर्भाग्य समझकर एप्लीकेशन नहीं लिखवाती ना ही पुलिस में शिकायत करना चाहती हैं तो आप परेशान हो जाते हैं या पुलिस एफ आई आर नहीं लिखती है आपकी जमीन से जुड़ी हुई बहुत सारी दिक्कतें आती हैं लेकिन जब जब आपके अंदर सवाल आते हैं और आप जवाबों को ढूंढना चाहते हैं और जज्बे के साथ लगन से काम करते हैं आधी समस्या दूर हो जाती है।
प्राची ने उनकी अपनी जिंदगी में डिप्रेशन या मानसिक दिक्कतों को कैसे सुलझाया जाए इस पर बहुत बेहतर तरह से सेल्फ काउंसलिंग के बारे में बताया और उन्हें प्रेरणादायक स्टोरीज भी सुनाई।
डॉ अर्चना ने बच्चों को कैसे डील किया जाए उसके बारे में बहुत बेहतर तरह से बताया ।
आज की कार्यशाला का आयोजन अर्चना पांडे ,पुष्पा तिवारी, अनुपमा, ममता गुप्ता, कंचन शर्मा आदि ने मिलकर किया।
2022-03-04
