छह बीघा जमीन का झगड़ा था बिकरू कांड की जड़

छह बीघा जमीन का झगड़ा था बिकरू कांड की जड़, आज तक विवाद का नहीं हुआ निपटारा
Sat, 03 Jul 2021
कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे के मुठभेड़ में ढेर होने के बाद उन तमाम जमीनों के विवाद समाप्त हो गए थे, जिन्हें लेकर बरसों से रस्साकसी चल रही थी। मगर, संयोग देखिए, जहां अन्य जमीनों के विवाद जिला प्रशासन ने आगे बढ़कर खत्म करा दिए, वहीं उस जमीन का मसला अब तक सुलझा है, जिसके लिए इतनी जानें चली गईं। उस जमीन पर कब्जा राहुल तिवारी का है, लेकिन जमीन अभी शिवम दुबे के बहनोई सुनील के नाम पर ही है।

बिकरू कांड की मुख्य वजह जादेपुर निवासी राहुल तिवारी की ओर से विकास दुबे व अन्य के खिलाफ कराई गई एफआइआर थी, जिसको लेकर दबिश देने के लिए पुलिस टीम दो जुलाई 2020 की रात बिकरू पहुंची थी। असल में जादेपुर निवासी राहुल तिवारी की शादी पड़ोस के गांव मोहनी निवादा निवासी लल्लन शुक्ला की बेटी के साथ हुई थी। लल्लन की केवल तीन बेटियां हैं, जिसमें दो की शादी हो चुकी है। लल्लन के जीवन काल से उनका भांजा सुनील उनके साथ रहने लगा था। सुनील की शादी विकास दुबे के भतीजे शिवम दुबे की बहन से हुई थी। लल्लन की मृत्यु के बाद सुनील ने दावा किया कि मरने से पहले मामा उसे साढ़े छह बीघा जमीन दान में दे गए हैं। इसी आधार पर सुनील ने जमीन का बैनामा भी अपने नाम से करवा लिया था। राहुल तिवारी ने इस बैनामे को कोर्ट में चुनौती दी है। करोड़ों की कीमत वाली जमीन पर विकास दुबे की नीयत भी खराब हुई और यही बिकरू कांड की सबसे बड़ी वजह बन गई। राहुल के मुताबिक, अधिकारी चाहें तो उसकी जमीन का विवाद भी खत्म हो सकता है, मगर कोई सुनवाई ही नहीं कर रहा है।

इन जमीनों का खत्म हुआ विवाद: विकास दुबे से जुड़े तमाम जमीनों के विवाद थे, जिसमें तारा चंद्र इंटर कालेज के प्राचार्य सिद्धेश्वर पांडेय की पांच करोड़ की जमीन सबसे अहम थी। अब दोबारा से पांडेय परिवार के पास इस जमीन का स्वामित्व आ गया है। शिवली के संतोष मिश्रा की छह बीघा जमीन पर विकास ने 20 साल पहले कब्जा कर लिया था। यह जमीन भी अब उनको मिल गई है। इसी तरह से उधारी के बहाने विकास दुबे ने मुन्ना यादव की सात बीघा जमीन कब्जा ली थी। इसमें से चार बीघा जमीन उन्हें वापस मिल गई है और जो जमीन उसने विकास के नाम कर दी थी, उसे वापस लेने के लिए उसने अदालत में केस कर दिया है।

यह था बिकरू कांड: दो जुलाई 2020 की रात बिकरू गांव में पुलिस ने विकास दुबे को पकडऩे के लिए उसके घर दबिश दी थी। उसने रास्ते में जेसीबी लगाकर पुलिसकर्मियों की घेराबंदी करके ताबड़तोड़ फायरिंग कर तत्कालीन सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्र समेत आठ पुलिस कर्मियों को शहीद कर दिया था। बाद में जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने विकास समेत छह लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया था, जबकि 37 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *